सोनभद्र। कुपोषितों को स्वस्थ्य बनाने और उनका कुपोषण दूर करने के लिए चलाई जा रही पोषाहार योजना बेपटरी हो गई है। जिले में पिछले तीन माह से पोषाहार की आपूर्ति नहीं हो रही। इससे 1825 आंगनबाड़ी केंद्रों पर करीब दो लाख गर्भवती, धात्री और बच्चों को पोषाहार नहीं मिल रहा है। फरवरी से ही पोषाहार का वितरण बंद है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि जब पोषाहार ही नहीं मिल रहा, फिर ऐसे में कुपोषण कैसे दूर होगा। भौगोलिक दृष्टि से जिला काफी दुरूह है।
यहां के तमाम गांव ऐसे हैं, जो अति पिछड़ेपन के शिकार हैं। ऐसे गांवों में गरीबी भी चरम पर है। लोगों को रोजगार न होने के नाते पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा। ऐसे में लाखों लोग कुपोषण के शिकार हैं।
पोषाहार आवंटन न होने से आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन ठप हो गया है। बुधवार को विशेष वितरण दिवस होने के बावजूद इन केंद्रों पर पोषाहार का वितरण नहीं हो सका।
ऐसे में केंद्रो पर पहुंचे नौनिहालों व गर्भवती, धात्री महिलाओं को बगैर पोषाहार के वापस लौटना पड़ रहा है। जिले के 1825 आंगनबाड़ी केंद्रों पर करीब दो लाख लोगों का नामांकन है। इसमें करीब 45 हजार गर्भवती और धात्री महिलाएं हैं। जबकि तीन से छह वर्ष तक के करीब 65 हजार बच्चे और छह माह से तीन वर्ष तक के करीब एक लाख बच्चे नामांकित हैं।
इन्हीं करीब दो लाख लोगों मं से शून्य से तीन वर्ष तक के करीब 50 हजार बच्चे कुपोषित हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाने वाले कुपोषण के शिकार बच्चों व गर्भवती, धात्री महिलाओं को फरवरी माह से ही पोषाहार नहीं मिल रहा है। जनवरी के बाद से जिले में पोषाहार की आपूर्ति ही नहीं हुई है। सभी केंद्रों पर लगने वाले विशेष दिवस पर भी नामांकितों को पोषाहार वितरित किये जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में केंद्रों पर पहुंचने वाले बच्चों व गर्भवती व धात्री महिलाओं को बगैर पोषाहार के वापस लौटना पड़ रहा है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत कुमार सिंह का कहना है कि जनवरी के बाद से ही पोषाहार आना बंद हो गया है। पोषाहार आपूर्ति के लिए ई-टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सप्लाई अभी शुरू नहीं हुई है। उम्मीद है कि मई तक आपूर्ति शुरू हो जाएगी। फिलहाल सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण बंद है।