पांच बड़े शहरों में बिजली के निजीकरण के खिलाफ अभियंताओं और कर्मचारियों ने बुधवार को विद्युत वितरण खंड कार्यालय राबर्ट्सगंज के सामने बुद्घि-शुद्घि यज्ञ किया। निजीकरण के फैसले को राज्य व केंद्र सरकार की दमनकारी नीति का परिणाम बताया और इसके अधिकारी कर्मचारी विरोधी करार दिया। चेताया कि मांग पूरी नहीं हुई तो नौ अप्रैल से 72 घंटे का कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि जिन शहरों में हजारों करोड़ रूपये खर्च कर विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था सुदृढ़ की जा चुकी है। पहले उन्हीं शहरों को निजी क्षेत्र को सौंपना ऊर्जा प्रबंधन एवं प्रदेश सरकार की मंशा पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। जबकि पूर्व में किये गये निजीकरण के प्रयोग पूरी तरह असफल हुए हैं। ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण के असफल प्रयोगों की पुनरावृत्ति का प्रतिकूल प्रभाव सीधे प्रदेश के सामान्य विद्युत उपभोक्ताओं एवं आम जनता पर पड़ेगा। विभागीय अधिकारियों ने विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने, राजस्व वसूली बढ़ाने, लाइन हानियां कम करने एवं विद्युत व्यस्था के दक्षतापूर्ण संचालन के लिए विभिन्न संगठनों की ओर से ऊर्जा मंत्री व विभागीय उच्चाधिकारियों को पूर्व में सुधार प्रस्ताव दिया था। उस पर अमल नहीं हुआ। एक वर्ष से प्रस्तावित विद्युत थानों को संचालित न करके सरकार अपनी असफलताओं पर पर्दा डालने का कार्य कर रही है। संगठन ने नौ अप्रैल से 11 अप्रैल तक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया। यहां एक्सईएन राजेंद्र प्रसाद, अनिल कुमार, चंद्रशेखर, अजय सिंह, अभिषेक कौशल, एसके सिंह, राकेश कुमार सिंह, पंचधारी सिंह, सत्यप्रकाश, सुजीत कुमार पाठक, पुष्पराज, इंद्रजीत, दिनेश कुमार मौजूद रहे।