क्षेत्र के 39 गांवों को पानी देने के लिए बनी बघोर पेयजल योजना चार दशक से बेकार पड़ी है। इन गांवों के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। सरकार पहले ही घोरावल ब्लॉक और उसके आसपास के इलाकों को डार्कजोन घोषित कर चुकी है। सुकृत और आसपास के इलाकों के लोग टैंकर के सहारे हैं। अब समस्या से निजात दिलाने के लिए जल निगम ने मधुपुर-सुकृत गवर्नमेंट वाटर सप्लाई स्कीम तैयार की है लेकिन यह फाइल शासन में लंबित है।
राबर्ट्सगंज और घोरावल ब्लाक के दर्जनों गांवों में दशकों से पानी बड़ी समस्या है। हर वर्ष गर्मी का मौसम शुरू होते ही पानी के लिए परेशान हो जाते हैं। मधुपुर इलाके में करीब अस्सी के दशक से ही पेयजल की समस्या से निजात दिलाने की मांग जनप्रतिनिधियों से की जाती रही है। उस समय मिर्जापुर जिला होने के कारण वहां से मधुपुर इलाके के सुकृत, धवठवां, खाने आजमपुर, तकिया, लोहरा, गौरही, कुतलुपुनर, बघोर, बघोरी, भवानीपुर, मुबारकपुर, मझुई, आमडीह, कम्हरिया, मधुपुर, परही, नागनार हरैया आदि गांवों के लिए डोंगिया जलाशय से पानी पहुंचाने की योजना तैयार की गई और जल-कल योजना से डोंगिया जलाशय के पास फिल्टर प्लांट एवं पंप, सुकृत विद्युत उपकेंद्र पर एक स्वतंत्र फीडर के साथ बघोर में पानी की टंकी का निर्माण और पाइप लाइन बिछाई गई।
वर्ष 1973-74 में परियोजना ट्रायल में ही फेल हो गई। उसके बाद वर्ष 1998 में पुन: डोंगिया जलाशय से पानी उठाने के बजाय बघोर पानी टंकी के समीप बोर कर टंकी में पानी चढ़ाया गया। नया बिजली कनेक्शन भी लगवाया गया, लेकिन पानी की सप्लाई महज 12 घरों तक ही सिमट कर रह गई। जबकि आपरेटर, फीटर और चौकीदार की तैनाती शुरू से है। पिछले वित्तीय वर्ष में मधुपुर-सुकृत गवर्नमेंट वाटर सप्लाई स्कीम के तहत डोंगिया जलाशय का पानी संरक्षण कर मधुपुर-सुकृत इलाके के 39 गांवों को सात जोन में बांटकर सप्लाई योजना तैयार की गई है। फिलहाल लोगों को डोंगिया जलाशय और टैंकर का पानी ही सहारा है।