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संत गाडगे के जीवन आदर्शों से मिलती है प्रेरणा

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विंढमगंज। दुद्धी ब्लॉक के महुली गांव में स्थित राजा बरियार शाह खेल मैदान में अखिल भारतीय अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारी कल्याण संघ के तत्वाधान में बोधिसत्व संत रविदास एवं संत गाडगे की जयंती मनाई गई। यहां विभिन्न आयोजन हुए। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त डीआईजी सीएम प्रसाद व अध्यक्षता शिव देनी प्रसाद ने गाडगे महाराज के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि संत गाडगे के जीवन, आदर्शों को आत्मसात कर जीवन को श्रेष्ठ बनाने की हमें प्रेणना मिलती है। गाडगे बाबा सच्चे निष्काम कर्मयोगी थे। गुरुदेव आचार्य ने ठीक ही बताया है कि एक लकड़ी, फटी-पुरानी चादर और मिट्टी का एक बर्तन जो खाने-पीने और कीर्तन के समय ढपली का काम करता था, यही उनकी संपत्ति थी। कार्यक्रम अध्यक्ष शिवदेनी प्रसाद ने कहा कि बाबा अनपढ़ थे, किंतु बड़े बुद्धिवादी थे। पिता की मौत हो जाने से उन्हें बचपन से अपने नाना के यहां रहना पड़ा था। वहां उन्हें गायें चराने और खेती का काम करना पड़ा था। सन् 1905 से 1917 तक वे अज्ञातवास पर रहे। इसी बीच उन्होंने जीवन को बहुत नजदीक से देखा विभिन्न परिस्थितियों के कारण बाबा को अंधविश्वासों, बाह्य आडंबरों, रूढ़ियों तथा सामाजिक कुरीतियों एवं दुर्व्यसनों से समाज को कितनी भयंकर हानि हो सकती है, इसका उन्हें भलीभांति अनुभव हुआ। यहां अरुण कुमार कन्नौजिया, भुल्लू राम, बालचंद राम, मनोज भारती, राधेश्याम कन्नौजिया मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अवधेश कुमार कन्नौजिया ने किया।
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