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महज रिफरल यूनिट बन गया है 50 बेड का मैटरनिटी अस्पताल

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घोरावल(सोनभद्र)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मैटरनिटी विंग में गुरुवार को नवजात शिशु की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलकर रख दी है। भारी भरकम बजट वाले इस 50 बेड के जच्चा-बच्चा अस्पताल में सुविधाओं को अभाव है। इस नवनिर्मित आलीशान अस्पताल में डॉक्टर, दवाई और जांच की सुविधा ही नही है। यह अस्पताल महज रेफरल यूनिट बनकर रह गया है।
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घोरावल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशापूर्ण लचर व्यवस्था को देखते हुए सीएचसी परिसर में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 50 बेड के मैटरनिटी विंग के निर्माण को मंजूरी पिछली सपा सरकार में मिली थी। करीब 477 लाख रुपये रुपये बजट से बनकर तैयार मैटरनिटी विंग के भवन का 23 दिसंबर 2016 को लोकार्पण हुआ। करीब एक वर्ष पूर्व इस 50 बेड के जच्चा बच्चा अस्पताल को मरीजों के लिए चालू किया गया। यहां इलाज व प्रसव के नाम पर गर्भवती महिलाओं व नवजातों के साथ मजाक हो रहा है। तमाम सुविधाओं की कमी के चलते यहां प्रसव कराना खतरे से खाली नहीं है। यहां पर भर्ती कुसुम्हा निवासी अनीता पत्नी अनिल ने बताया कि बृहस्पतिवार की रात में वह भर्ती हुई थी। घंटे भर बाद उसे बच्चा पैदा हुआ। गुरुवार रात और शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक उसे कोई भी दवा या भोजन नही दिया गया। मात्र एक कप चाय पीने को मिला था।
डोरिहार निवासी चंदा पत्नी वीरेंद्र को शुक्रवार सुबह छह बजे भर्ती कराया गया। उसे सिबियर एनीमिया और हीमोग्लोबिन कम होने के नाते रिफर कर दिया गया। मगरदहां निवासी ललिता पत्नी नंदन बृहस्पतिवार की रात में भर्ती हुई। पानी की थैली टूटने और बच्चे द्वारा गंदा पानी पीने की संभावना के मद्देनजर उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। ललिता ने भी बताया कि गुरुवार रात से लेकर शुक्रवार दोपहर बारह बजे तक सिर्फ एक कप चाय मिला था। अस्पताल में गंदगी है और शौचलयों की हालत खराब है। स्टाफ रूम से सटे हुए शौचालय में बेहद गंदा है, जहां इंसान को एक मिनट भी खड़ा होना मुश्किल हैै। यह अस्पताल सिर्फ रेफरल यूनिट बनकर रह गया है।
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सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ की नहीं है तैनाती
घोरावल। सीएचसी क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं के लिए उम्मीद की एकमात्र किरण है। प्रतिदिन यहां पांच से दस और महीने में ढाई सौ से तीन सौ तक प्रसव कराए जाते हैं। फिर भी यहां सर्जन, बालरोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिक की तैनाती नहीं है। यहां कोई एमबीबीएस महिला डाक्टर नहीं है। एकमात्र आयुष के डाक्टर तैनात हैं। अल्ट्रासाउंड से लेकर कई तरह की जांच भी यहां नहीं होती है। मैटरनिटी विंग में कार्यरत आयुष की चिकित्सक यशु शुक्ला ने बताया कि यहां पर सर्जन, महिला एमबीबीएस डॉक्टर, बालरोग विशेषज्ञ नही हैं। तमाम जरूरी सुविधाएं, जरूरी जांच, आवश्यक दवाओं की कमी है। इस नाते गर्भवती महिलाओं की हालत गंभीर होने, सीजेरियन की समस्या पर उन्हें रिफर करना पड़ता है।
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