सोनभद्र। जिले में गुरुवार को श्रावण शिवरात्रि का पर्व आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही शिवालयों में दर्शन-पूजन, अभिषेक के लिए भीड़ उमड़ी रही। देर शाम तक जगह-जगह रूद्राभिषेक का आयोजन होता रहा। फाल्गुन में चतुर्दशी के दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। वहीं श्रावण में चतुर्दशी के दिन होने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन पूजन-अर्चन, अभिषेक से भगवान शिव अतिशीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और भक्त को मनचाहा वरदान देते हैं। इसको देखते हुए शिवद्वार मंदिर, कंडाकोट महादेव, पंचमुखी मंदिर, बरैला महादेव, गौरीशंकर महादेव, शोभनाथ महादेव, अचलेश्वर महादेव, नलराजा महादेव, रोरवा स्थित शिव मंदिर, घिवही शिव मंदिर, अनपरा स्थित पंचमुखी शिवलिंग मंदिर, परियेाजना कालोनी स्थित शिवमंदिर, बीजपुर स्थित अजीरेश्वर महादेव, शक्तिनगर स्थित शक्तेश्वर महादेव, राबट्र्सगंज स्थित वीरेश्वर महादेव, रामगढ़ क्षेत्र के शिवाला महादेव मंदिर के पट भोर में ही खोल दिए गए। सभी जगह सुंबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहा। शिवद्वार में देर रात तक पूजन-अर्चन अभिषेक का क्रम चला। इस दिन पंचामृत स्नान के साथ ही विभिन्न सामग्रियों से रूद्राभिषेक किया गया। डा. शिवकुमार शास्त्री के मुताबिक वैसे तो श्रावण में पूरे माह भगवान शिव गौरी संग रहते हैं और श्रावण का प्रत्येक दिन विशेष महत्व रखता है। इसमें भी श्रावण शिवरात्रि का विशेष महत्व है। जिस तरह महाशिवरात्रि को भगवान शिव का पूजन-अर्चन का विशेष लाभ मिलता है। उसी तरह श्रावण शिवरात्रि को भी लाभ मिलने की मान्यता है।