सोनभद्र। जिले में संचालित राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों के 48 में से 27 पद रिक्त चल रहे हैं। मजबूरी में प्रधानाचार्यों का कार्य उनके मातहतों को प्रभारी बनाकर कराया जा रहा है।
अति पिछड़े जिले में कुल 48 राजकीय हाईस्कूल और इंटर काॅलेज संचालित हैं। इनमें 32 राजकीय हाईस्कूल और 16 राजकीय इंटर काॅलेज हैं। इन विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी है। बच्चों को कई विषयों की पढ़ाई कर पाना संभव नहीं हो पा रही है।
जिले में कुल 32 राजकीय हाईस्कूल में से 19 में प्रधानाध्यापक का पद सालों से रिक्त है। इन विद्यालयों में राजकीय बालिका हाईस्कूल मेदनीखाड़, सागोबांध, इमदरी, नवांटोला और चांगा शामिल है। इसके साथ ही राजकीय हाईस्कूल चौना, हाईस्कूल जुगैल, हाईस्कूल चकरिया, राजकीय हाईस्कूल चिचलिक, पड़वनिया सहित अन्य हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक नहीं है।
राजकीय हाईस्कूल के प्रधानाचार्यों के पद भरने को लेकर कोई खास पहल नजर नहीं आ रही है। उधर, राजकीय इंटर कॉलेजों की बात करें तो इंटर काॅलेजों की स्थिति भी दयनीय है। जिले में कुल 16 राजकीय इंटर कॉलेज संचालित हैं। इनमें से 8 विद्यालयों में प्रधानाचार्य का पद रिक्त है। इन में राजकीय इंटर काॅलेज शक्तिनगर, राजकीय इंटर कालेज अनपरा, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज दुद्धी, राजकीय इंटर काॅलेज गुरमुरा, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज ओबरा, पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय माॅडल इंटर काॅलेज मेरदह, मुल्लाहडीह, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज डोहरी, राजकीय माडल इंटर काॅलेज रामगढ़ शामिल हैं। ऐसे में हाईस्कूल के विद्यालयों के प्रधानाचार्य का कार्य वहां के सहायक अध्यापक देख रहे हैं। वहीं इंटर काॅलेजों में प्रवक्ता प्रधानाध्यापक के पद पर काम देख रहे हैं। राजकीय विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों के पद रिक्त होने से विद्यालयों में पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
अक्सर होती है खींचतान
जिले भर में दो दर्जन से अधिक राजकीय स्कूलों में प्रधानाध्यापक न होने के कारण समस्या हो रही है। वरिष्ठता क्रम या फिर एक समान होने के कारण कई बार प्रभार मिलने को लेकर शिक्षकों में खींचतान होती है। ऐसे में कई बार पद को लेकर कई उच्चाधिकारियाें के पास शिकायतें पहुंचती हैं।
जिले में कई काॅलेजों में प्रधानाचार्य की तैनाती हुई है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पढ़ाई हो रही है। - राजेंद्र यादव, डीआईओएस।