लंबी मशक्कत के बाद अनपरा परियोजना ने बुधवार की सुबह 2603 मेगावाट विद्युत उत्पादन का आंकड़ा छू लिया। हालांकि कुछ देर बाद ही थर्मल बैकिंग शुरू होने से यह आंकड़ा 23 सौ मेगावाट से नीचे आ गया। अब 2630 मेगावाट उत्पादन लक्ष्य हासिल करने की कोशिश शुरू हो गई है। हालांकि यह उपलब्धि निरंतर बनी रही, इसमें थर्मल बैकिंग बड़ा रोड़ा बन गई है। लगातार बैकिंग से राज्य उत्पादन निगम को रोजाना अच्छा-खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसको लेकर बैकिंग पर रोक लगाने की मांग उठने लगी है।
अनपरा परियोजना में 210 मेगावाट की पहली, दूसरी, तीसरी, पांच सौ मेगावाट की चौथी, पांचवी, छठवीं और सातवीं इकाई स्थित है। सभी इकाइयां बेहतर तरीके से उत्पादन पर है लेकिन छठवीं और सातवीं इकाई में एक सप्ताह से लगातार जारी थर्मल बैकिंग से जहां परियोजना का अधिकतम उत्पादन का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
वहीं सातवीं इकाई के तीस दिन के ट्रायल संचालन में अभी तक पेंच फंसा हुआ है। जिसको लेकर भेल की तरफ से निगम प्रबंधन को पत्र भी भेजा जा चुका है। सीजीएम अनपरा त्रिभुवन तिवारी ने भी बुधवार सुबह विद्युत उत्पादन 2603 मेगावाट तक पहुंचने की पुष्टि की। कहा कि वह लगातार 26 सौ मेगावाट या इससे अधिक उत्पादन बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन लगातार थर्मल बैकिंग से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। फिर भी कोशिश है कि बेहतर उत्पादन बना रहे।
उधर, राज्य उत्पादन निगम अधिकारी एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जामवंत प्रसाद ने कहा कि अनपरा की बिजली प्रदेश में सबसे सस्ती है। यहां बैकिंग सबसे अंत में तथा कोई विकल्प न रहने की दशा में उनका केंद्रीय नेतृत्व कई बार आवाज उठा चुका है, लेकिन अब तक इस पर रोक नहीं लग सका है। जल्द ही इसको लेकर नए सिरे से रणनीति बनाई जाएगी।