जिले में स्वास्थ्य महकमे की नाक के नीचे अवैध पैथोलॉजी केंद्र संचालित हो रहे हैं।
पूरे जिले में सिर्फ 25 लैब पैथोलॉजी जांच के लिए अधिकृत हैं, जबकि 200 से अधिक केंद्रों का संचालन हो रहा है। यहां बाकायदे मरीजों की जांच कर उन्हें रिपोर्ट भी दी जा रही है।
अति पिछड़े जिले में सरकारी अस्पतालों में खून सहित अन्य जांचों के बेहतर इंतजाम नहीं हैं। इसका लाभ निजी पैथाेलॉजी केंद्रों को खूब मिल रहा है। गली- मोहल्लों में बिना पंजीकरण के पैथोलॉजी की दुकानें अवैध ढंग से संचालित हैं।
इस पर मधुमेह, रक्त एलएफटी, केएफटी, डेंगू, मलेरिया की भी जांच होने का जिक्र है। ज्यादातर लैब में डिग्रीधारक और प्रशिक्षित तकनीशियन नहीं हैं और न ही एमडी पैथोलाजिस्ट हैं।
ऐसे में जांच रिपोर्ट को लेकर लोगों के मन में संदेह रहता है कि उनकी रिपोर्ट गलत है या सही। इसलिए वह दो-तीन लैब में जांच कराते हैं, जहां रिपोर्ट में भिन्नता आने पर वह मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं।