अनपरा। ऊर्जांचल के 41 गांवों, मजरों को आरओ प्लांट से शुद्ध पानी देने के लिए रोजाना 24 लाख लीटर पानी व्यर्थ बह जा रहा है। इसके उपयोग के लिए कई बार मांग उठी। एनजीटी में याचिका दाखिल है। सालाना दो मीटर जल तल गिर रहा है। बावजूद अब तक कोई कार्ययोजना नहीं बनाई गई।केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 1991 में सोनभद्र की 6905, सिंगरौली की 4328 वर्ग किमी एरिया को अति प्रदूषित बताया था।
2013 में इसे देश के तीन सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्रों में एक का दर्जा दिया। मई 2014 में एनजीटी ने प्रदूषण प्रभावितों को आरओ प्लांट से शुद्ध पेयजल मुहैया कराने को कहा। अब तक 41 गांवों और मजरों में 83 आरओ प्लांट लग चुके हैं। इसमें 70 प्लांट ऐसे हैं, जिनसे प्रतिदिन 8000 लीटर, 13 प्लांट ऐसे हैं, जिनसे चार हजार लीटर (कुल 6.12 लाख लीटर) शुद्ध पानी निकाला जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इसके एवज में करीब चार गुना यानी लगभग 24 लाख लीटर जल रोजाना व्यर्थ बह जा रहा है। उधर, जल निगम निर्माण शाखा के एक्सईएन आरएस बंसल ने माना कि आरो के पानी के उपयोग की अभी कोई कार्ययोजना नहीं बनी है।