शंकर यादव ने बताया कि रुपये देने के बाद भी नौकरी नहीं लगी तब रुपये का तगादा शुरू कर दिया। उसे, उसके भाई और प्रमोद यादव को काशी विद्यापीठ वाराणसी ले जाया गया। वहां कार्यालय में कार्यभार ग्रहण करने का प्रमाण पत्र भी दिला दिया गया। उस पर नियुक्ति प्राधिकारी का हस्ताक्षर और काशी विद्यापीठ की मुहर लगी थी।
इसके बाद कहा गया कि सचिवालय से कुलपति के यहां पत्र आएगा। उसके बाद ही नियमित ड्यूटी करनी होगी। फिर एक फरवरी 2019 को काशी विद्यापीठ ले जाया गया जहां से चार फरवरी को उपस्थित होकर मूल पत्रावलियां दिखाने का पत्र थमाया गया।
इसके बाद जब चार फरवरी को पहुंचे तो पता चला न कोई नियुक्ति का पद निकला है नहीं उन्हें कोई पत्र अधिकारियों ने जारी किया है। इस संबंध में कोतवाल अंजनी कुमार राय ने कहा कि अभी उनके समक्ष तहरीर नहीं आई है। जैसे ही तहरीर मिलती है जांच कर कार्रवाई की जाएगी।