फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेकार साबित हो रही हैं पेयजल परियोजनाएं

विज्ञापन
विज्ञापन
घोरावल। आदिवासी, दलित बाहुल्य घोरावल तहसील क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति के लिए बनी योजनाएं बेकार साबित हो रही हैं और पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। करोडों की लागत से बनी इन समूह योजनाओं का हाल पूरी तरह भगवान भरोसे हो गया है और सफेद हाथी बन कर रह गया है। लंबे अरसे से इन योजनाओं से ग्रामीणों इलाकों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। समस्या के संबंध में संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कदम न उठाएं जाने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
विज्ञापन

घोरावल क्षेत्र में पेयजल की गंभीर समस्या को देखते हुए 80 के दशक में तीन पेयजल ग्राम समूह योजना शासन द्वारा बनाई गई। शिवद्वार, इमलीपोखर और मुक्खा ग्राम समूह पेयजल योजना शुरू हुई लेकिन उसमें से मुक्खा पेयजल परियोजना वर्षों से बंद है। इन तीनों पेयजल योजनाओं से शिवद्वार, कोहरथा, पड़वनिया, बर, कन्हरा, जानर, सिंहावल, डोरिहार, भरकना, सतद्वारी, कड़िया, अमिलौधा, मुक्खा, करसोता, पत्थरताल, मधका, लहास, सिरसाई, घुवास, परसौना, इमलीपोखर, सपही, मूर्तियां, बभनी समेत करीब 50 गांव जुड़े हुए थे, जहां की करीब एक लाख आबादी को इन योजनाओं का लाभ मिलना था। लेकिन लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। मुक्खा ग्राम समूह पेयजल योजना के लिए मुक्खा फाल से पानी उठाया जाता था। यह योजना पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और कई वर्षों से बंद पड़ी है। इसकी मशीन, पाइप तक गायब हो चुका है। शिवद्वार ग्राम समूह योजना के लिए बेलन नदी से पानी उठाया जाता है। इस योजना से करीब दो दर्जन गांव जुड़े हुए थे, जो वर्तमान में महज छह गांवों तक सीमित है। पिछले करीब दो महीनों से ये योजनाएं पूरी तरह बंद हैं और ग्रामीणों को एक बूंद पानी भी नहीं मिल पा रहा है। इमलीपोखर ग्राम समूह पेयजल योजना भी बुरी तरह बदहाल है औऱ इसका लाभ लंबे अरसे से ग्रामीणों को नही मिल पा रहा है। इस वर्ष बारिश कम होने से जहां जल स्तर बहुत नीचे चला गया है, वहीं दूसरी ओर योजना से जुड़ी बेलन नदी व अन्य स्थानों का पानी पूरी तरह सूख जाने से इन योजनाओं पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। सतद्वारी प्रधान माधुरी यादव, मुक्खा ग्राम प्रधान महेश मिश्रा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष कौशल किशोर मिश्रा, कोहरथा ग्राम प्रधान हनुमान प्रसाद बैसवार का कहना है कि गर्मी का मौसम शुरू होते ही क्षेत्र में पेयजल संकट शुरू हो जाता है। योजनाओं का पुनरोद्घार हो जाए तो क्षेत्र के लोगों को सहूलियत मिलेगी।

नदी में पानी न होने की वजह से पेयजल परियोजनाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं। बारिश होने पर ही यह परियोजनाएं चल सकेंगी। गर्मी में पानी की आपूर्ति के लिए टैंकर संचालित किए जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

फणींद्र राय, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें