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भाठ क्षेत्र के परिषदीय विद्यालय राम भरोसे

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अनपरा। ऊर्जांचल के भाठ क्षेत्र के लगभग तीन दर्जन से अधिक प्राथमिक और जूनियर विद्यालय के बच्चों का भविष्य शिक्षकों की उदासीनता से अधर में है। भाठ क्षेत्र के स्कूलों के अध्यापक समय से स्कूल नही पहुंच रहे हैं इससे बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
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रणहोर ग्राम सभा के मिर्चाधुरी के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार को ऐसा ही नजारा देखने को मिला जहां आठ बजे स्कूल खुलने का समय होने के बाद भी न तो पूर्व माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक और न ही प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक विद्यालय पर नजर आए। विद्यालय पहुंचे बच्चे शिक्षकों की राह को देखते हुए खेलते नजर आये। कक्षा आठ के शिव शंकर, कक्षा सात के विजय कुमार तथा कक्षा छह के अशोक कुमार ने बताया कि विद्यालय की दाई सुबह स्कूल खोलने के साथ ही प्रार्थना भी कराती है। भाठ क्षेत्र के अभिभावकों की सदैव शिकायत रहती है कि शिक्षक विद्यालय में न तो समय से आते हैं और न ही समय से जाते हैं। उनके आने जाने का कोई टाइम टेबल नहीं होने के कारण हजारों बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
प्राथमिक विद्यालय मिर्चाधुरी में प्रधनाध्यापक सहित एक शिक्षामित्र व एक सहायक नियुक्त है, इसके बावजूद भी एक भी लोग समय से स्कूल नहीं पहुंचे। इस संबंध में प्रधानाध्यापिक कविता ने फोन कर बताया कि उनका वाहन खराब हो गया था । जिससे वह समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाई जबकि पूर्व माध्यमिक विद्यालय के एक मात्र शिक्षक प्रधानाध्यापक राजेश पाठक अवकाश पर थे। सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी दिलीप कुमार का कहना है कि मामले को संज्ञान में लेकर जांच कर कार्रवाई की जायेगी।
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शिक्षकों के स्थानांतरण नियमों को रखा ताक पर
अनपरा। शिक्षा विभाग के अधिकारी शिक्षकों के ट्रांसफर के खेल में नियमों को ताक पर रखकर अपना नियम चला रहे है। आलम यह है कि म्योरपुर ब्लाक के 388 परिषदीय विद्यालयों में से अधिकांश विद्यालयों में एक शिक्षक के ऊपर 50 से 60 छात्र-छात्रायें जहां ंनिर्भर है वहीं कहीं कहीं तो पूरे विद्यालय में छात्रों की संख्या दो दर्जन से अधिक नहीं है और वहां चार-चार, पांच-पांच अध्यापक नियुक्त है। शिक्षकों की मानें तो सड़क पर स्थित विद्यालयों में तैनाती को लेकर मोटी रकम वसूली जाती है । जिससे दूरदराज के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी हो जाती है। मिर्चाधुरी के ही पूर्व माध्यमिक विद्यालय को ले लिया जाये तो कक्षा आठ में 33, कक्षा सात में 18 तथा कक्षा छह में 20 बच्चों की जिम्मेदारी एक शिक्षक पर सौंपी गई है। वह भी कभी आते है कभी नहीं आते है इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाठ क्षेत्र के विद्यालयों का क्या हाल होगा।
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