लखनऊ में मुख्यमंत्री के फ्लीट के आगे कूदने वाले ओबरा निवासी श्याम जी मिश्र रविवार की सुबह ओबरा वापस लौट आए। उसने लखनऊ पुलिस की पूछताछ में कहा था कि वह सोनभद्र में अवैध खनन को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन, अनशन कर चुका है, लेकिन आज तक जांच नहीं हुई। इसी जांच की मांग को लेकर वह शनिवार को हजरतगंज में मुख्यमंत्री के फ्लीट के आगे कूदा था, ताकि उन तक समस्या पहुंचाई जा सके। लखनऊ पुलिस ने पूछताछ के बाद शनिवार की रात श्यामजी को छोड़ दिया था।
श्यामजी मिश्र पिछले कई सालों से अवैध खनन के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं। ओबरा में प्रदर्शन के साथ ही श्याम ने पिछले दिनों वाराणसी में प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय के सामने भी धरना दिया था और अवैध खनन के जांच की मांग उठाई थी। श्यामजी ने बताया कि सोनभद्र में लंबे अर्से से अवैध खनन का मुद्दा उठाता रहा हूं, लेकिन इस पर कभी कोई बड़ी जांच और कार्रवाई नहीं हुई। इस पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री के समक्ष यह मुद्दा उठाने के लिए लखनऊ गये, लेकिन वहां मुख्यमंत्री से न मिल पाने की सूरत में शनिवार को उनकी फ्लीट के सामने कूद गए। श्याम ने बताया जब पुलिस ने गिरफ्तार किया और फ्लीट के सामने कूदने की वजह पूछी तो अवैध खनन का पूरा मामला बता दिया। यह भी बताया कि जिले में अवैध खनन को तमाम लोगों का संरक्षण है। शनिवार की रात लखनऊ में पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया और रविवार की सुबह श्याम ओबरा पहुंच गए।
श्याम जी मिश्रा को एक साल पहले ही भाजपा से निकाला गया है। श्यामजी ने लखनऊ पुलिस को शनिवार को दिए बयान में सोनभद्र के भाजपा जिलाध्यक्ष पर अवैध खनन में शामिल लोगों की मदद करने का आरोप लगाया था। लखनऊ में इंस्पेक्टर हजरतगंज आनंद शाही ने बताया कि श्याम जी मिश्रा पावर प्लांट में मजदूरों की आपूर्ति करता है। उसके पिता अशोक कुमार मिश्रा बिजली विभाग में बाबू हैं। इसके खिलाफ वह कई बार प्रदर्शन कर चुका है। इसी वजह से उसे पार्टी से भी निकाल दिया गया था। कुछ दिन पहले उसने लखनऊ में लक्ष्मण मेला मैदान और 1090 चौराहे पर भी अनशन किया था।
श्याम जी मिश्रा ने सोनभद्र जिला प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह अवैध खनन को बढ़ावा दे रहा है। अधिकारी अवैध कारोबार करने वालों को 2200 रुपये में मिलने वाली अनुमति 14 हजार रुपये लेकर दे रहे हैं। इस पर रोक लगाने के लिए वह कई बार मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश कर चुका है।