सिंगरौली (सोनभद्र)। एनटीपीसी-उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय लखनऊ की तरफ से बृहस्पतिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में फ्लाई ऐश के सुरक्षित निस्तारण की जानकारी दी गई। एनटीपीसी-विंध्याचल के महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण) राजशेखरन पद्मकुमार ने बताया कि राख़ का उपयोग सीमेंट निर्माण, सड़क निर्माण, असबेस्टस उद्योग, ऐश डाइक बांध स्थापना, इमारतों के लिए ऐश ब्रिक्स और ऐश ब्लॉक आदि में तो किया ही जा रहा है, एनसीएल की बंद पड़ी खदानों में इसके भराव का समझौता भी एनसीएल से फाइनल कर लिया गया है। फिलहाल एनटीपीसी विंध्याचल परियोजना से उत्सर्जित राख़ एनसीएल की बंद पड़ी गोरबी खदान में भरी जाएगी।
कहा कि लोगों को राख़ की उपयोगिता के प्रति जागरूक करने और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही सौ किमी तक एनटीपीसी परियोजना की तरफ से नि:शुल्क ऐश ढुलाई की व्यवस्था भी की गई है। बताया कि सड़क, तटबंध निर्माण, भूमि भराव, ऐश डाइक निर्माण, खदान भराव में भी राख के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस सिंगरौली (शक्तिनगर) विद्युतगृह के सीजीएम देवाशीष सेन, रिहंद परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक अशेष मुखर्जी एनटीपीसी विंध्याचल के एके श्रीवास्तव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसडी तिवारी, महाप्रबंधक-उत्तरी क्षेत्र कुलविंदर सिंह, महाप्रबंधक तकनीकी सेवाएं विंध्याचल संगीता कौशिक, अपर महाप्रबंधक ऐश यूटिलाइजेशन एमके जैन, प्रबंधक मानव संसाधन-नैगम संप्रेषण एवं राजभाषा-विंध्याचल सतीश कुमार श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। परियोजना द्वारा 100 किलोमीटर तक फ्लाई ऐश के नि:शुल्क परिवहन की व्यवस्था भी की गई है ।