सोनभद्र। पशु पालकों को अब पशुओं के बेहतर देखभाल के लिए परेशान नहीं होना होगा। पशुओं को खुले आसमान के नीचे रखने से भी निजात मिलेगी। श्रम एवं रोजगार विभाग ने पशुओं के बेहतर देखभाल के लिए पशु आश्रय केंद्र बनवाने का निर्णय लिया है। इसके तहत अधिकतम एक से सवा लाख रुपये तक के केंद्रों का निर्माण होगा। पशु पालकों की पात्रता के अनुसार ही उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा। निर्माण कार्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार योजना (मनरेगा) से कराया जाएगा।
जिले में तमाम ऐसे पशु पालक हैं, जिन्होंने पांच से दस पशुओं को रखा है और उन्हीं के जरिए दूध आदि का रोजगार भी करते हैं। लेकिन ज्यादातर ऐसे पशु पालक हैं, जिनके पास पशुओं को रखने का उचित इंतजाम नहीं है। वे पशुओं को खुले आसमान के नीचे बांधते हैं। इससे बारिश के दिनों में पशु बारिश के साथ ही गिरने वाली आकाशीय बिजली के शिकार हो जाते हैं। ऐसी समस्या से पशु पालकों को निजात दिलाने के लिए श्रम एवं रोजगार विभाग ने पशु आश्रय केंद्र खोलवाने का निर्णय लिया है।
इसके तहत उन्हीं पशु पालकों को इसका लाभ दिया जाएगा जिनके पास पांच से अधिक गाय-भैंस हों या दस से ऊपर बकरियां हों। पशु पालक अनुसूचित जाति, जनजाति, बीपीएल की श्रेणी का हो या लघु सीमांत किसान हो। उन्हें रोजगार सेवक या ग्राम पंचायत के सचिव के यहां आश्रय केंद्र बनवाने के लिए आवेदन करना होगा। आवेदन के परीक्षण के बाद पात्र पाये जाने वाले लाभार्थियों के यहां पशु आश्रय केंद्र के निर्माण के लिए स्टीमेट तैयार कराया जाएगा और फिर निर्माण कराया जाएगा। इसके तहत खर्च होने वाली मजदूरी और सामानों का भुगतान मनरेगा से किया जाएगा। यह भुगतान राशि सीधे मनरेगा मजदूर और सामग्री की आपूर्ति करने वाले के खाते में भेजी जाएगी। आश्रय केंद्र बनने से पशु पालक पशुओं की कायदे से देखभाल कर सकेंगे। यह निर्माण जिले के आठो ब्लॉकों में लाभार्थियों के यहां कराया जाएगा।
तैयार मॉडल के अनुसार ही बनेगा पशु आश्रय केंद्र
सोनभद्र। उपायुक्त मनरेगा जीपी सिंह का कहना है कि पशु आश्रय केंद्र का निर्माण शासन से तैयार किये गए मॉडल के अनुसार ही बनेगा। इस पर अधिकतम एक से सवा लाख रुपये तक ही खर्च किये जाएंगे। इससे पशुओं की अच्छी देखभाल होने के साथ ही पशु पालकों के लिए एक परिसंपत्ति भी सृजित हो जाएगी।