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एनजीटी के आदेश व सुझाव को दिखा रहे ठेंगा

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अनपरा। ऊर्जांचल में प्रदूषण की स्थिति भयावह होती जा रही है। इस पर लगाम लगाने के उपायों की अनदेखी से स्थिति लगातार बिगड़ रही । एनजीटी ने सड़क मार्ग से कोयला की आपूर्ति पर रोक लगाने के साथ ही कई आदेश जारी किए थे बावजूद ट्रकों से कोयला का परिवहन किया जा रहा है। इससे लोगों में लगातार आक्रोश बढ़ रहा है।
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जिले में हर साल भले ही लोग फ्लोरोसिस की चपेट में आ रहे हैं, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी के लिए चिंता की बात नहीं है। एनजीटी की समितियों की रिपोर्ट भी उन्हें संदेहास्पद नजर आने लगी हैं। इसके साथ ही जनपद में प्रदूषण है या नहीं के सवाल पर ये अधिकारी पुरानी रिपोर्टों का हवाला देकर अपने बचाव में खड़े नजर आ रहे हैं। बीते दिनों सिंगरौली व अनपरा क्षेत्र का दौरा करने के बाद एनजीटी की हाई कमेटी के सदस्यों ने यह माना था कि प्रदूषण का मामला मानवता से जुड़ा हुआ है। यह भी तय हुआ था कि एनजीटी द्वारा गठित कमेटी के आदेश व सुझाव का सभी अनुपालन करेंगे। लेकिन ये सभी मामले परियोजना प्रबंधकों व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के आगे कोई मायने नहीं रखते।
ऊर्जांचल व सिंगरौली परिक्षेत्र में उद्योगों से जल, वायु एवं भूमि पर व्यापक दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ माह पूर्व क्षेत्र के 1194 व्यक्तियों की जांच की गई थी। रिपोर्ट में 779 लोगों में प्रदूषण के कारण विभिन्न बीमारियां होने का प्रमाण मिला। 382 लोगों में दंत फ्लोरिस व 113 हड्डी एवं जोड़ों के फ्लोरोसिस से ग्रसित थे। इसकी वजह भूगर्भ जल में उच्च फ्लोराइड सहित लेड, मर्करी, आर्सेनिक, कैडमियम जैसे विषैले तत्वों का मौजूद होना है।
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सड़क मार्ग से कोल परिवहन पर नहीं लगी रोक
एनजीटी की हाई कमेटी ने सड़क से कोयला के परिवहन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। इसके अतिरिक्त ऊर्जांचल एवं सिंगरौली परिक्षेत्र में स्थित सभी सरकारी एवं निजी उद्योगों द्वारा जल एवं वायु में फैलाए जा रहे प्रदूषण की वृहद समीक्षा कर गम्भीर सुझाए गए थे लेकिन कमेटी के आदेश का जिम्मेदारों पर कोई असर नहीं हुआ।

रहवासियों में बढ़ रहा आक्रोश
अनपरा के जलालुद्दीन, रमेश सिंह, प्रशांत गुप्ता, हरि प्रसाद गुप्ता ने कहा कि ऊर्जांचल में प्रदूषण की समस्या चरम पर पहुंच गयी है। बार-बार धरना प्रदर्शन व आंदोलन करने के बावजूद कोई पहल नहीं की जा रही है। विस्थापितों की जमीन पर स्थापित परियोजनाएं एवं कारपोरेट कंपनियां क्षेत्र के नौजवानों को रोजगार नहीं दे रही हैं। यहां लोगों को अपनी पुश्तैनी जमीन के बदले धूल, धुआं तथा विभिन्न प्रदूषण ही मिल रहा है। प्रदूषण से जहां विभिन्न बीमारियां फैल रही है वहीं लोग दमा, कैंसर, हृदय रोग, त्वचा रोग का शिकार हो रहे हैं।

जिले के कुछ क्षेत्रों में निकलने वाले पानी में फ्लोराइड की मात्रा मिली है लेकिन यहां गंभीर स्थिति उद्योग वाले क्षेत्रों में है। यहां पर फ्लोरोसिस बीमारी होने का प्रमुख कारण यही है। -एसपी सिंह, सीएमओ, सोनभद्र।
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