सोनभद्र। राबर्ट्सगंज के आरटीएस क्लब प्रांगण में चल रहे श्रीराम चरित मानस नवाह्न पाठ महायज्ञ के पांचवें दिन शुक्रवार को यज्ञ मंडप की परिक्रमा को सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान समूचा नगर मानस की चौपाइयों से गुंजायमान रहा।
आचार्य संतोष धर दुबे, शिवकुमार शास्त्री, अनिल पांडेय, यशवंत पांडेय ने मुख्य यजमान किशोर केडिया के जरिए वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रात:कालीन पूजा-अर्चना एवं आरती का कार्य संपन्न कराया। इसके बाद मानस पाठ व्यास सूर्यलाल मिश्र के आचार्यत्व में 111 भूदेवों के जरिए शुरू हुआ। जहां एक तरफ मानस की चौपाइयों से समूचा यज्ञ पांडाल के साथ ही समूचा नगर गुंजायमान हो गया, वहीं दूसरी तरफ सुबह से ही यज्ञ मंडप की परिक्रमा को महिलाओं, युवतियों, बच्चों का तांता लगा रहा। इस मौके पर महामंत्री सुशील पाठक, राधेश्याम जालान, अयोध्या दुबे, गुल्लू भंडारी, राजकुमार, सुशील, विमलेश सिंह, अशोक गुप्ता, संगम, रविंद्र, सुंदर केशरी, शिशु, मृत्युंजय, सुधाकर, खुशदिल आदि मौजूद रहे।
उधर, राबर्ट्सगंज आरटीएस क्लब में गुरुवार को चौथे दिन सायंकालीन प्रवचन में गोरखपुर से पधारे हेमंत त्रिपाठी ने संगीतमयी भजन में श्रीराम वनगमन की कथा सुनाई। जौनपुर से पधारे राजेंद्र प्रसाद ओझा ने कहा कि श्रीराम के राज्याभिषेक में विघभन स्वरूपा माता कैकेयी का हठ कि मेरे पुत्र भरत का राज्याभिषेक क्यों नहीं किया जा रहा। जनमें एक संग सब भाई, भोजन, शयन, खेल लरिकाई। जौनपुर से ही पधारे प्रकाशचंद्र विद्यार्थी ने केवट की परम भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीरामचंद्र गंगा पार करने हेतु केवट को बुलाया, परंतु मांगी नाव न केवट आना, कहहूं मरम तुम्हार मैं जाना। काफी प्रयास के बाद केवट आया और इस शर्त पर गंगा पार करने को तैयार हुआ कि आपका पैर धोने के बाद ही मैं अपनी नैया में आप लोगों को पार करूंगा। केवट सशंकित होकर कहा कि आपके पैर की धूल से पत्थर भी नारी बन जाता है। वैसे ही कहीं मेरी काठ की नाव भी नारी न बन जाए। मेरे परिवार का भरण-पोषण भी इसी नाव के सहारे चलता है। संचालन डॉ. कृष्णानंद त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर सुशील पाठक, रतनलाल गर्ग, रामसकल चौबे, मन्नू पांडेय, शिशु त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
सुंदरकांड पाठ का आयोजन 16 जनवरी को
सोनभद्र। राबर्ट्सगंज स्थित प्राण रक्षक हनुमान मंदिर में सोनभद्र विकास मंच के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि आगामी 16 जनवरी को सत्यनारायण कथा के साथ ही सुंदरकांड पाठ कराया जाएगा। यह आयोजन सभी के कल्याण के लिए किया जाएगा।