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खाद्य पदार्थों में तेजी से घुल रहा प्रदूषण का जहर

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सोनभद्र। हवा, पानी और मिट्टी के बाद अब खाद्य पदार्थों में भी प्रदूषण का जहर तेजी से घुलने लगा है। अनाज के साथ ही दूध में भी मरकरी की मात्रा बढ़ी पाई गई। इसकी वजह पानी में मरकरी की मात्रा का बढ़ना है। लोक विज्ञान संस्थान की ओर से क्षेत्र के कुछ गांवों में एक वर्ष तक सर्वे किया गया। जिसके बाद सामने आए आंकड़े डराने के साथ ही चिंता में डालने वाले हैं। लोक विज्ञान संस्थान देहरादून के रिसर्च एंड टेक्निकल हेड डा. अनिल गौतम, डा. जीडी अग्रवाल के साथ ही एनजीटी की कोर कमेटी की तरफ से किए गए सर्वे और सैंपलिंग के मुताबिक रनटोला, देवघर, जुगैल, गयादह और लिलासी कला गांव के कुओं (भूजल) में भी तेजी से मरकरी की मात्रा बढ़ रही है। सैंपलिंग रिपोर्ट के अनुसार इन गांवों में मरकरी की मात्रा एक मिलीग्राम प्रति लीटर के मुकाबले 40 से 60 मिलीग्राम प्रतिलीटर तक पहुंच गई है। चोपन ब्लाक के रेणुकापार अंचल स्थित जुगैल में सर्वाधिक 60 मिलीग्राम प्रति लीटर मरकरी पाई गई है। इसी तरह गडिय़ा, बराईडांड़, देवहार पूर्वी, महुली, झारोकला, काचन, मनबसा, देवखर, पिपरी, चांगा और रणहोर की स्थिति भी खतरे का संकेत देने वाली है। डा. अनिल गौतम इसकी पुष्टि करते हुए बताते हैं कि यह आंकड़ा एक वर्ष के भीतर का है। कहा कि इसको लेकर व्यापक अध्ययन के लिए इस पर नियंत्रण के लिए प्रभावी पहल की जरूरत है। वह मानते हैं कि पानी में मरकरी की मात्रा बढ़ने का सीधा असर खाद्य पदार्थों पर पड़ता है।
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आर्सेनिक की मौजूदगी दे रही खतरे का संकेत
सोनभद्र। सर्वे टीम ने बराईडांड़, अहिरबुड़वा, महुली, झारोकला, काचन, मनबसा, गयादह, चांगा, जुगैल में हैंडपंप और रनटोला, गडिय़ा, बराईडांड़, देवहार पूर्वी, अहिरबुड़वा, महुली, झारोकला, काचन, देवगढ़, जुगैल, जोगेंद्रा में कुएं के पानी का नमूना लेकर आर्सेनिक की मात्रा जांची थी। इसमें गडिय़ा में हैंडपंप में सर्वाधिक 18 माइक्रोग्राम प्रति लीटर और मनबसा में कुएं से लिए गए सैंपल में 28 माइक्रोग्राम प्रति लीटर आर्सेनिक की पुष्टि हुई है। पानी में इसकी मौजूदगी के स्टैंडर्ड मानक 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर है। 25 माइक्रोग्राम तक पहुंचने पर इसे खतरनाक माना जाता है।

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फ्लोराइड के मामले में सोनभद्र देश में टॉप पर
सोनभद्र। फ्लोराइड को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आई रिपोर्ट भी डराने लगी है। डा. एके गौतम के रिसर्च के मुताबिक फ्लोराइड के मामले में देश के सर्वाधिक संवेदनशील उत्तर प्रदेश के उन्नाव, उड़ीसा के नौपड़ा, खुर्दा, मध्यप्रदेश के धार के मुकाबले सोनभद्र टॉप पर है। यहां हैंडपंप, कुआं, ट्यूबवेल, तालाब सभी में फ्लोराइड की मात्रा 45 मिलीग्राम से 75 मिलीग्राम तक मिली है। वहीं नौपड़ा, धार के तालाब, धार के कुओं में फ्लोराइड पूरी तरह नियंत्रण में है।
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खतरनाक रासायनिक तत्वों के दुष्परिणाम
मरकरी: मानसिक क्षमता, मांसपेशियों पर नियंत्रण, प्रजनन पर असर, बांझपन, गर्भपात।
आर्सेनिक : चमड़ी रोग, कैंसर, फेफड़े, गुर्दे, मूत्राशय का कैंसर।
फ्लोराइड : दांत, हड्डी को नुकसान, शारीरिक विकलांगता।
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