शक्तिनगर। काशी विद्यापीठ के शक्तिनगर परिसर में विज्ञान वर्ग की शिक्षा नहीं उपलब्ध कराने का प्रयास असफल हो साबित हुआ हो गया है। बुनियादी ढांचे की कमी व पावर प्रबंधन की बेरुखी से योजना पर पानी फिरा तो छात्रों की आस टूट गई। इसको लेकर नाराजगी देखी जा रही है।
औद्योगिकीकरण के बाद भी अति पिछड़े क्षेत्र में सस्ती शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए काशी विद्यापीठ को शक्तिनगर में परिसर (कैंपस) उपलब्ध कराने का न्योता पावर प्रबंधन ने दिया था। इसके बाद हुए एक अनुबंध के तहत विद्यापीठ ने एनटीपीसी सिंगरौली के परिसर (शक्तिनगर) में साल 2006 में कैंपस खोला और पढ़ाई शुरू हो गई। लेकिन 12 साल तक अनुबंध की कई शर्तों पर अमल नहीं होने से पावर प्रबंधन व विद्यापीठ प्रशासन के बीच दूरियां बढ़ती गई। अब स्थिति यह है कि विद्यापीठ प्रशासन विज्ञान वर्ग के लिए पूरा संसाधन देने को खड़ा है लेकिन बुनियादी सुविधाओं (भवन आदि) का अभाव राह में रोड़ा बन गया है। विद्यापीठ प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि कि यूपी-एमपी के सीमांचल क्षेत्र में स्थिति इंटरमीडिएट कालेजों व क्षेत्रीय जनता की मांग को देखते हुए विद्यापीठ ने विज्ञान वर्ग की उच्च कक्षाओं का संचालन करने की तैयारी पूरी कर लिया है मगर पावर प्रबंधन की बेरुखी तैयारी पर भारी पड़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि अनुबंध के मुताबिक भवन आदि की सुविधा उपलब्ध कराना पावर प्रबंधन के जिम्मे है इसके बाद भी प्रबंधन ना तो भवन दे रहा है ना ही भूमि जिससे विद्यापीठ खुद सुविधाओं व कक्षाओं का विकास कर सके। इसके उलट पावर प्रबंधन के अफसर पूरे मसले पर कुछ बोलने को तैयार नहीं। काशी विद्यापीठ के शक्तिनगर परिसर के निदेशक प्रो. सभाजीत सिंह यादव ने बताया कि अनुबंध के मुताबिक सुविधाएं नहीं मिलने से विज्ञान, बीएड, बीएससी व नर्सिंग जैसे पाठ्यक्रम नहीं चला पा रहे वह भी ऐसे में जब विश्वविद्यालय ने शिक्षा शुल्क संरचना को बेहद कम व आम लोगों के पहुंच में कर दिया है। बातचीत से हल निकालने की कोशिश जारी रहेगी।