सोनभद्र । समय-समय पर अभियान चलाए जाने के बाद भी जिले में डग्गामार वाहनों का संचालन रुक नहीं रहा है। पिछले कुछ सालों में ऐसे वाहनों के खिलाफ कई बार अभियान चलाए गए। उनका चालान हुआ, कई सीज भी हुए। इसके बावजूद संचालन नहीं थमा।
जिले में डग्गामार वाहनों का संचालन रुक नहीं रहा है। कई रूटों पर बेधड़क चल रहे डग्गामार वाहनों के चलते दुर्घटना का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। कार्रवाई के बाद भी प्रशासन इस पर रोक नहीं लगा पा रहा। आरटीओ दफ्तर में छोटे से लेकर बड़े वाहनों के रूप में लगभग दो हजार सवारी वाहन पंजीकृत है। इसमें सबसे ज्यादा आटो का पंजीकरण है जबकि बस और अन्य वाहन कम हैं। मजेदार बात यह है कि सवारी में पंजीकृत वाहनों का परमिट कुछ किमी की परिधि के लिए जारी होता है, लेकिन वे नियम को तोड़ विभागीय अधिकारियों से मिलकर सवारी लेकर लंबी दूरी तय करते हैं। इस बाबत एआरटीओ एसपी सिंह का कहना है कि डग्गामार वाहन का मतलब ज्यादातर लोग नहीं समझ पाते। बिना परमिट संचालित होने वाले वाहनों को डग्गामार वाहन कहा जाता है। ऐसे वाहनों की तादाद कम है। बताया कि दो दिन से स्कूल बसों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से स्कूली बच्चों को लेकर संचालित होने वाले वाहनों की जांच की जा रही है। इसी तरह समय समय पर बिना पंजीयन, बिना फिटनेश व डग्गामार वाहनों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है।