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200 किमी दायरे में नहीं होंगे ईंट के भट्ठे

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सोनभद्र (अनपरा)। विद्युत परियोजनाओं से निकलने वाली राख प्रदूषण का कारण बन रही है। इस राख से ईंट बनाई जाएंगी। एनजीटी ने निर्णय लिया है कि राख उत्सर्जित करने वाली विद्युत परियोजनाओं के दो सौ किमी दायरे में लाल ईंट बनाने के लिए भट्ठों को लाइसेंस न दिया जाए और राख से बनी ईट का इस्तेमाल सरकारी, अर्द्धसरकारी व निजी भवनों के निर्माण में करने की बाध्यता तय की जाए।
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एनजीटी की कोर कमेटी ने कहा कि विद्युत परियोजनाओं से निकलने वाली राख से प्रदूषण फैलता जा रहा है। इस राख्र को तमाम परियोजनाएं रिहंद जलाशय में भी छोड़ रही है। इस पर रोकथाम का आदेश दिया गया था लेकिन संबंधित परियोजनाओं द्वारा कोई खास काम नहीं किया गया, जिससे जलीय जीव जंतुओं पर भी खतरा मंडराने लगा है। प्रदूषण के चलते सिंगरौली व सोनभद्र की आबोहवा जहरीली हो गई है। इसी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि परियोजनाओं से उत्सर्जित राख का शत प्रतिशत उपयोग किया जाए। उसे जलाशय में कत्तई न छोड़ा जाए। इसके तहत राख से निर्मित ईट के उपयोग को बढ़ावा देने का काम सरकार का है। इसके अलावा यह तैयारी चल रही है कि सरकार राख उत्सर्जित करने वाली परियोजनाओं के दो सौ किमी दायरे में किसी भी ईट भट्ठे का लाइसेंस जारी न करे। लोगों पर दबाव बनाया जाए कि लाल ईट की जगह राख से निर्मित ईट का ही प्रयोग भवन बनाने में करें। इससे काफी हद तक प्रदूषण पर रोक लगाने में कामयाबी मिलेगी।
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