सोनभद्र। शासन स्तर से धन मिलने के बाद बावजूद कई ग्राम सचिवालयों का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। जबकि सचिवालयों का कार्य कराने के नाम पर धन की निकासी कर ली गई है। मामला संज्ञान में आने पर मई में डीएम पीके उपाध्याय ने सीडीओ और डीपीआरओ एमपी द्विवेदी को अधूरे सचिवालयों की सूची तैयार करवा कर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। लेकिन डीपीआरओ का स्थानांतरण होने के बाद सचिवालयों की जांच ठंडे बस्ते में चली गई।
बताते चले कि जिले में चार मार्च 1989 से 29 मई 2107 तक 441 ग्राम पंचायतों में सचिवालय बनाने कें लिए धन जारी किया जा चुका है। हालांकि अभी कई ग्राम सचिवालयों का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हे सका है। जबकि संबंधितों ने सचिवालय बनाने के नाम पर धन की निकासी कर ली है। मई 2017 में चेरूई गांव के कुछ लोगों ने डीएम को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि वर्ष 2013-14 मेें उनके यहां सचिवालय का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक पूर्ण नहीं हो सका है। डीएम के निर्देश पर चेरूई पहुंच कर सदर एसडीएम विशाल यादव ने ग्रामीणों के शिकायत की जांच की तो सचिवालय में लाइट की वायरिंग, प्लास्टर आदि नहीं मिला। उन्होंने जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। चेरूई की तरह कई गांवों में सचिवालयों का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। जानकारी होने पर डीएम ने सीडीओ और डीपीआरओ को सभी बीडीओ के माध्यम से उनके क्षेत्र मेें बने सचिवालयों की जांच करवाकर अंधूरे सचिवालयों की रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देेश दिया था। ताकि धन निकालने के बाद भी काम न कराने वालों विरूद्घ कार्रवाई की जा सकें। लेकिन डीपीआरओ का स्थानांतरण होने जाने के कारण अभी तक सचिवालयों की जांच नहीं सकी। नवागत डीपीआरओ गोपाल ओझा ने कहा कि डीएम के निर्देशानुसार सचिवालयों की जांच करवा कर रिपोर्ट अविलंब डीएम को उपलब्ध कराया जाएगा।