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टमाटर किसान मायूस, महज एक रुपये किलो की है दर

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सोनभद्र/करमा। टमाटर का उत्पादन करने वाले किसान मायूूस हैं। टमाटर के खरीदार नहीं मिल रहे, इस कारण उन्हें उनकी उपज का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। किसान महज एक रुपये किलो की दर से टमाटर बेचने के लिए विवश हैं। हालात ऐसे हैं कि खरीदार भी नहीं पहुंच रहे, जिससे वे खेत में ही टमाटर छोड़ दे रहे हैं। प्रति बीघे करीब 40 हजार रुपये तक की क्षति झेल रहे किसानों में सरकार के उपेक्षात्मक रवैये को लेकर असंतोष है।
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जिले का करमा, खैराही, डिलाही, पगिया, करकी समेत तमाम क्षेत्रों में टमाटर की खेती होती है। किसान प्रति बीघे जमीन पर करीब 25 हजार रुपये खर्च कर करीब 50 से 60 कुंतल टमाटर का उत्पादन करते हैं। लेकिन इस बार किसानों का लागत मूल्य तक नहीं निकल रहा है। इससे उनमें मायूसी है। वर्तमान में उत्पादन स्थल पर महज एक रुपये किलो की दर से टमाटर बिक रहा है। ज्यादातर खरीदार ही नहीं पहुंच रहे, जिससे मायूस किसान खेत में ही टूटा हुआ टमाटर छोड़ दे रहे हैं। सिरसिया ठकुराई निवासी किसान सभाजीत सिंह पटेल का कहना है कि आज की तारीख में टमाटर की दुर्गति हो रही है। पैसे से कौन कहे मुफ्त में भी कोई टमाटर लेने को तैयार नहीं है। इस खेती से उन्हें करीब 40 हजार रुपये प्रति बीघा की क्षति हुई है। जय शंकर प्रसाद मौर्य का कहना है कि टमाटर की खेती अब घाटे का सौदा हो गया है। शुरू में तो टमाटर ठीक ठाक बिक जा रहा था, लेकिन अब 15 दिन से टमाटर के खरीदार नहीं हैं। बृजेश सिंह का कहना है कि अभी तक लोग अपना टमाटर बेच ले रहे थे लेकिन अब हुई बारिश से टमाटर के फलों में दाग आ जाएगा। इससे उसे बेच पाना अब किसानों के लिये टेढ़ी खीर साबित हो जाएगा। रामपति सिंह पटेल का कहना है कि बृहस्पतिवार को हुई बारिश से जहां गेंहू, जौ, चना जैसी फसलों को फायदा पहुंचा है, वहीं सरसों, अरहर, मसूर आदि फसलों को ओला वृष्टि से नुकसान हुआ है। शासन स्तर से टमाटर क्रय-विक्रय की कोई व्यवस्था नहीं है। न ही कोई स्थायी टमाटर मंडी बनी है। इससे किसान परेशान हैं।
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