रेणुकूट-शक्तिनगर के बीच डग्गामार वाहनों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। ऐसे में इन वाहनों की कमान अक्षम चालकों के हाथों में है। जिससे हादसों का सबब बन रहे हैं। लेकिन विभाग इसके प्रति पूरी तरह लापरवाह बना है। प्राइवेट बसों समेत इन डग्गामार वाहनों से परिवहन विभाग को प्रति माह लाखों रुपये राजस्व की क्षति उठानी पड़ रही। एआरटीओ ने दो बार अभियान भी चलाया। तीन जीप पकड़ी भी गई लेकिन बाद में फिर डग्गामार वाहन सड़क पर दौडने लगे।
डग्गामार वाहनों पर अंकुश न लगने से जहां वायु व ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि हो गई है। परिवहन विभाग की उदासीनता से सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। एक तरफ वातावरण में फैल रहे प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली व मुंबई जैसे महानगरों में पुराने वाहनों को सड़क से हटाया जा रहा है लेकिन जिले में जुगाडू वाहन सड़क पर फर्राटे मारते देखे जा रहे हैं। विडंबना तो यह है कि ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के प्रति संबंधित विभाग की उदासीनता चर्चा का विषय बनी हुई है। अक्षम चालकों के हाथ में स्टेयरिंग व शोर मचाते धुआं उगलते वाहनों पर प्रतिबंध लगाकर न सिर्फ बढ़ते प्रदूषण को रोका जा सकता है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं पर भी लगाम लगाई जा सकती है।
कोट
एआरटीओ व परिवहन विभाग अधिकारियों की संयुक्त टीम समय-समय पर अभियान चला कर डग्गामार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। मई में सात दिनों का अभियान चलाकर ऐसे वाहनों की धरपकड़ की जाएगी।
एमएल केसरवानी
एआरएम विंध्यनगर डिपो