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तीन हजार कुपोषित परिवारों को नहीं मिला शौचालय

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सोनभद्र। प्रदेश सरकार अति कुपोषित बच्चों की दर में कमी लाना चाहती है। इसके तहत सूबे के अपर मुख्य सचिव चंचल कुमार तिवारी की ओर से डीपीआरओ को पत्र दिया गया है। जिसमें उनसे कहा गया है कि कुपोषित बच्चों के परिवारों में प्राथमिकता के आधार पर व्यक्तिगत शौचालय निर्माण कराकर गांव को खुले में शौच से मुक्ति दिलाया जाएं। लेकिन अब तक करीब तीन हजार अति कुपोषित बच्चों के परिवारों को शौचालय नहीं मिला है।
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केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किशोरियों को कुपोषण से बचाने के लिए कई योजनाएं शुरू की है। बावजूद इसके बच्चें कुपोषित हो रहे है। 25 मार्च 2018 तक राबर्ट्सगंज, घोरावल, चतरा, नगवां, चोपन, दुद्धी, म्योरपुर और बभनी ब्लॉक में करीब 15200 अति कुपोषित है। प्रदेश सरकार ने अति कुपोषित बच्चों की दर में दिसंबर 2018 तक दो प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अपर मुख्य सचिव चंचल कुमार तिवारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र भेज कर कहा गया है कि कुपोषित बच्चों के परिवारों में प्राथमिकता के आधार पर व्यक्तिगत शौचालय निर्माण कराकर गांव को खुले में शौच से मुक्ति किया जाए। इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत सिंह ने कहा कि चिह्नित 15200 अति कुपोषित बच्चों मेें से करीब 13 हजार बच्चों के परिवारों का शौचालय बन चुका है। कहा कि सभी सीडीपीओ से जिन अति कुपोषित बच्चों के यहां शौचालय नहीं बना है उनकी सूची मांगी गई है। डीपीआरओ को जिनके यहां शौचालय नहीं बना है उनकी सूची उपलब्ध करा कर अविलंब शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।
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