सोनभद्र। जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज समेत जिले भर में गुरुवार को निर्जल एवं निराहार रहकर व्रतियों ने शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। विंढमगंज में प्रदेश के राज्यमंत्री कारागार एवं लोक सेवा प्रबंधक जय कुमार सिंह जैकी ने आरती किया। कई छठ घाटों पर मेले के आयोजन के साथ ही रात्रि जागरण का भी हुआ । समूचा क्षेत्र छठ मईया के गीतों से गुलजार रहा। पूजा स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम किए गए थे।
गांजे-बाजे के साथ अपरान्ह करीब तीन बजे घर से व्रती लोग अपने परिजनों के साथ सिर पर सूप लिए छठ घाटों के लिए निकलने लगी थी। घाट पर अपने नियत स्थान पर बनाये गए वेदियों पर व्रतियों ने अपने सूपों को रखकर भगवान भाष्कर की अस्त होने का इंतजार करने लगी। सूर्यास्त के समय सूर्य को अर्घ्य दिया और पुत्र प्राप्ति तथा पुत्रों की दीर्घायुु की कामना की। सूप पर घी के दिए जलाएं और भगवान भाष्कर का स्मरण किया। देर शाम व्रती लोग अपने घरों को वापस हुए। राबट्रर्सगंज के रामसरोवर, अकड़हवा पोखरा, मेहुड़ी नहर, बढ़ौली शिव सरोवर, बरकरा तालाब पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मेहुड़ी नहर के पास भीड़ उमडने से खलियारी-घोरावल मार्ग पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। हालांकि जवानों के साथ कोतवाल राजीव मिश्रा और चौकी प्रभारी अरशद खां वाहनों को गतव्य रवाना करने में जुटे रहे। एसडीएम विशाल यादव, एएसपी मुख्यालय अरूण कुमार दीक्षित, सीओ विवेकानंद तिवारी अलग-अलग घाटों पर भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे।
दुद्धी: नगर केे कैलाश कुंज द्वार, लौवा नदी ,जाबर गांव के प्राचीन तालाब, प्राचीन मराठा तालाब पर व्रतियों की भीड़ लगी रही। पूजा घाटों पर सूपों में दीपक जलाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके बाद घाटों पर विधि-विधान से पूजा किया। दुद्धी शिवाजी मराठा तालाब पर जय बजरंग अखाड़ा समिति और रामलीला कमेटी समेत अन्य संस्थाओं की ओर से श्रद्धालुओं की सेवा में वालेन्टियर तैनात किए गए थे। प्रभारी निरीक्षक विनोद यादव भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। कोन: पांडू नदी के तट पर सूर्य भगवान को पहला अर्घ्य दिया गया। समाज सेवियों, ग्राम प्रधान समेत अन्य संस्थाओं के सदस्य व्रतधारियों की सेवा में लगे रहे। कोन बाल क्लब द्वारा अर्घ्य देने के लिए दूध उपलब्ध कराया गया। ग्राम पंचायत खेतकटवा की तरफ से चाय की व्यवस्था की गई। सूर्य मंदिर क्लब ने लोगों की सहायता के लिए शिविर लगाकर उपचार की व्यवस्था कराया। लोगों का मानना है कि व्रतधारियों के सहयोग करने से उन्हें भी उतना ही पुण्य मिलता है जितना व्रत रखने वाले को मिलता है। रामकुमार जायसवाल, कृष्णा नन्द पटेल, शिवरात्रि, मोती चंद्र, राजाराम, मोती चौरसिया, अनुज आदि सेवा जुटे रहे।
केकराही: क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ छठ पूजन किया गया। केकराही, लोहरा समेत अन्य गांवों की तालाबों पर व्रतियों ने पूजन-अर्चन किया। देर रात तक यहां श्रद्धालुओं ने छठ मईया का स्मरण किया। बभनी: चपकी, असनहर, बड़होर, खोतोमहुआ, चऊना, नधिरा, आसनडीह समेत अन्य गांवों में बने घाटों पर व्रतियों ने सूर्य को अघ्र्य देकर छठ मइया का पूजन-अर्चन किया। प्रभारी निरीक्षक राजकुमार सिंह घाटों का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। रेणुकूट: कस्बे में विश्कर्मा नगर, वन कालोनी, रेणुकेश्वर मंदिर, पिपलेश्वर मंदिर, राम मंदिर, ग्रासिम कालोनी, पिपरी में हनुमान मंदिर, रिहंद जलाशय के पास बने छठ घाटों पर व्रती लोगों ने विधि-विधान से छठ मईया को पूजन-अर्चन कर मिन्नतें मांगी। खलियारी: क्षेत्र के खलियारी, पडऱी, पनिकप खुर्द, सरईगढ़, आमडीह, सुअरसोत, तेंदुआ, काजियारी, मांची समेत अन्य गांवों में स्थित तालाबों पर बने घाट पर सुख, शांति समृद्धि पुत्र प्राप्ति हेतु सूर्य की बहन षष्टी यानि छठ की पूजा बृहस्पतिवार को हुई। चोपन: सोन नदी के पावन तट पर गुरुवार को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया गया। व्रती सूप में ठेकुआ, सठौरा जैसे कई पारंपरिक पकवानों के साथ ही केला, गन्ना सहित विभिन्न प्रकार के फल रखकर सूर्य को अर्घ्य दी। दीपों से पूजा घाट जगमगा गया था। चहुंआर छठ मईया की जयकारा सुनाई दे रही थी। देर रात तक पूजा स्थलों पर श्रद्धालु डटे रहे। कई समाजसेवियों की तरफ से टेंट आदि की व्यवस्था की गई थी। घोरावल: नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में धूमधाम के साथ डाला छठ पर्व मनाया गया। श्रद्धालुओं ने निर्जल व्रत रखकर अस्ताचलगामी भगवान भाष्कर को अघ्र्य दिया। छठ मईया की गीतों पर श्रद्धालु नाचते-गाचते घाट पर पहुंचे।