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जीव, जंतु, मृदा करते हैं प्रकृति संतुलन का काम

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म्योरपुर। टेबलेट विज्ञान प्रसार व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार की ओर से चल रही चार दिवसीय प्रकृति अध्ययन कार्यशाला का मंगलवार को समापन हुआ। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुद्धी के उप प्राचार्य डॉ. रामजीत सिंह यादव ने कहा कि प्रकृति में जलवायु, मृदा और जीव-जंतु समेत सारे अवयव संतुलन का निर्माण करते हैं। यदि यह संतुलन बिगड़ता है तो हमारे लिए खतरनाक स्थिति होती है। अभिज्ञान शाकुंतलम् नाटक का उदाहरण देते हुए बताया कि हमारे प्राचीन साहित्य में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रकृति प्रेम की शिक्षा दी गई है। म्योरपुर के बीडीओ श्रवण कुमार ने कहा कि किताबों के बोझ से बचपन कुम्हला रहा है। कार्यशालाओं के जरिये बच्चे सहजता से शिक्षा प्राप्त करते हैं। जीव विज्ञान के प्रवक्ता डॉ. मिथिलेश गौतम ने कहा कि हमें इस बात की चिंता करनी चाहिए कि हमारी भावी पीढ़ियों क्या भोगेंगी। बेल्जियम की अनू ने कहा कि हम विकास के पूर्व निर्धारित मार्ग पर चलते रहना चाहते हैं। इससे प्रकृति संरक्षण संभव नहीं है। हमें अपना रास्ता बदलना होगा। प्रशिक्षक डॉ. संध्या वर्मा ने कहा कि शिक्षक एवं बच्चे अपने विद्यालय प्रकृति अध्ययन के कार्यक्रम आयोजित करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लाभांवित हो सके। बनवारीलाल मलैया, डॉ. गरिमा, गोपाल सिंह, अनीता, बनवासी सेवा आश्रम की मंत्री शुभा, दिनेश चंद्र शर्मा और डॉ. सत्येंद्र सिंह आदि ने भी विचार रखे।
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