दुद्धी। ब्लॉक के मल्देवा गांव में महारानी दुर्गावती स्मारक स्थल पर दो दिवसीय आदिवासी महासम्मेलन शनिवार से शुरू हो गया। बावन गण देवी-देवताओं के पूजन-अर्चन के बाद आदिवासी गीत-संगीत के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। इसमें आदिवासियों के पिछड़ेपन और उनके विकास में आ रही बाधाओं समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई।
पहले दिन कार्यक्रम में संयोजक फौदार सिंह परस्ते ने कहा कि आदिवासी समाज पिछड़ेपन का शिकार है। समाज की मूल संस्कृति और सभ्यता पर को बचाने की जरूरत पर जोर देते उन्होंने कहा कि उन्हें जल, जंगल और जमीन से बेदखल न किया जाए। बताया कि दो दिवसीय आदिवासी महासम्मेलन के पहले दिन पूजा पाठ किया गया है। इसके साथ आदिवासी संस्कृति से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति आदिवासी कलाकारों ने की। विशिष्ट अतिथि प्रदेश सचिव अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड महासभा यूपी रामविचार सिंह टेकाम ने कहा कि आदिवासी समाज को उसका अधिकार देने की जरूरत हैं लेकिन जिस तरह से उनके अधिकारों पर हमले हो रहे हैं, वह ठीक नहीं हैं। यदि इसी तरह हमले होते रहे तो आदिवासियों का वजूद खत्म हो जाएगा। आदिवासियों के विकास की जरूरत है। जल, जंगल और जमीन को क्षति पहुंचाकर आदिवासियों को विनाश की ओर धकेला जा रहा है। वृक्ष की पूजा आदिवासी संस्कृति का अहम हिस्सा है लेकिन उन्हें बेरोकटोक काटा जा रहा है। इस मौके पर मीरा सिंह, आशा सिंह, सविता सिंह, बुद्धिनारायन खरवार, गंभीर सिंह, मुख्य धर्माचार्य सुखई सिंह पोया, रामनाथ, रामलोचन, हीरा सिंह, देवंती सिंह, रामफल सिंह, राजकुमार सिंह, रामचरण सिंह, सुरेंद्र सिंह पोया मौजूद रहे।