म्योरपुर। हवाई पट्टी को हवाई अड्डे का रूप देने के लिए चल रही कवायद के बीच भूमि अधिग्रहण कार्य को झटका लगा है। किसानों ने नए मूल्यांकन के आधार पर तय किए गए मुआवजे की रकम को अपर्याप्त बताया है। मामले में राज्यसभा सांसद के हस्तक्षेप के बाद मंगलवार को एसडीएम ने हवाई पट्टी पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान का आश्वासन दिया। रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत म्योरपुर हवाई पट्टी को हवाई अड्डे का रूप देने के लिए भूमि अधिग्रहण का काम इन दिनों चरम पर है। भूमि अधिग्रहण के तहत सोमवार को आधा दर्जन किसानों को तहसील प्रशासन ने ले जाकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उधर दूसरी तरफ नए मूल्यांकन के आधार पर तय मुआवजे की रकम से क्षुब्ध किसानों ने तहसील प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया है। तहसील प्रशासन जबरिया लोगों को बेदखल करके जमीन हड़पना चाह रहा है। उन्होंने राज्य सभा सदस्य रामसकल से सोमवार की रात इसकी शिकायत की थी। सांसद की पहल पर एसडीएम रामचंद्र यादव ने किसानों की समस्याओं को हवाई पट्टी पर सुना। किसानों का कहना था कि अगस्त से जारी नई रेट लिस्ट के हिसाब से उन्हें 22 सौ रुपए के हिसाब से उनका मुआवजा तय होना चाहिए। सड़क के किनारे की खाली जमीनों को कृषि रेट से खरीदा जा रहा है, जबकि रजिस्ट्री करते समय इन जमीनों को आवासीय दर पर स्टांप शुल्क आदि अदा करना पड़ता है। ग्राम प्रधान लालता प्रसाद जायसवाल, अमरकेश सिंह, सोना बच्चा अग्रहरि, सत्यनारायण यादव, मनोज मिश्रा ने कहा कि मूल्यांकन के हिसाब से ही उनको मुआवजे की रकम तय की जाए। एसडीएम ने कहा कि आगरा एक्सप्रेस वे निर्माण के दौरान वे वहां पर एसडीएम थे। उन जमीनों का भी अधिग्रहण कृषि दर के हिसाब से किया गया था। उन्होंने कहा कि कनहर और हवाई पट्टी में अंतर है। उदाहरण दिया कि जयकुंवर देवी बनाम रामकेश यादव ने खरीदी हुई जमीन के मामले में 22 सौ रुपए के रेट से स्टांप शुल्क अदा किया गया है। ऐसे में इन लोगों का भुगतान भी आवासीय होना चाहिए। यहां राजेंद्र चौधरी, लेखपाल सुरेंद्र नारायण पाठक, राजकुमार, भगवान दास, बबलू, पंकज मौजूद रहे।
म्योरपुर। हवाई पट्टी के विस्तारीकरण के नए मूल्यांकन के बाद में मुआवजे को लेकर किसान पशोपेश में पड़े हुए हैं। किसान बहादुर व मुन्ना पुत्र राजमन की कुल जमीन 0.0633 हेक्टेयर अधिग्रहण में आ रही है। ऐसे में दोनों भाइयों को तहसील प्रशासन अलग-अलग मुआवजे की रकम दे रहा है, जबकि दोनों का गाटा संख्या 799 ख में बराबर का हिस्सा है। मुन्ना का आरोप है कि तहसील प्रशासन बहादुर को आवासीय दर से भुगतान कर रहा है, जबकि उसे कृषि दर के हिसाब से भुगतान की रकम तय की गई है। मुन्ना ने मामले की विस्तृत जांच कर मुआवजे की रकम तय करने की मांग की है।