म्योरपुर। युवा स्वयं सेवक अपने गांव के प्रभावशाली व्यक्तियों जैसे ग्राम प्रधान, आंगनबाड़ी, आशा, शिक्षक, विवाह कराने वाले पंडित धर्मगुरु, विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष की मदद से गांव में होने वाले बाल विवाह को रोक सकते हैं। इसके लिये युवा स्वयं सेवकों को गांव होने वाले समूह की बैठक में भाग लेकर बाल विवाह से होने वाले दुष्प्रभाव पर चर्चा करना चाहिये। यह बातें कम्यूनिकेशन फार डेवलपमेंट विशेषज्ञ यूनिसेफ लखनऊ की सुखपाल मारवा ने बनवासी सेवा आश्रम के ग्राम निर्माण केंद्र बकुलिया में बुधवार को एक दिवसीय किशोरी-युवा स्वयं सेवक प्रशिक्षण कार्यशाला में कहीं।
उन्होने कहा कि समाज में फैले बुराई को समाप्त करना आसान नहीं पर युवा इसमें आगे आयेगें तो यह बुराई निश्चित ही समाप्त हो जायेगी। वातावरण निर्माण के आप अपने गांव में बाल विवाह व घरेलू हिंसा के नारे ग्राम प्रधान के सहायता से लिखवा सकते है। जब किसी लड़की की पढ़ाई रूक जाती है तो वहीं से उसका बाल विवाह होने की खतरा बढ़ जाता है और बाल विवाह होगा तो उस परिवार में घरेलू हिंसा की संभावनायें अधिक हो जाती है। प्रशिक्षक नीरा बहन प्रतिभागियों से मिलकर सामूहिक गीत तोड़, तोड़ बंधनों को देखो बहने आती हैं आयेगीं नया जमाना लायेगीं गाया। प्रशिक्षक राधेकृृष्ण ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुये बताया कि सोनभद्र के गांवों में अभी भी 33 प्रतिशत बाल विवाह हो रहे है। बाल विवाह होने से घरेलू हिंसा हो रहा है। बाल विवाह होने से हम अपने बुनियादी अधिकारों शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, रोजगार व सम्मान का अधिकार नहीं प्राप्त कर पातें। इसके लिये परिवार में अपनी बात खुद कहना चाहिये और गांव के जिम्मेदार व्यक्तियों से अपने समूह के जरिए भी बात करनी चाहिये। प्रशिक्षण में राधेकृष्ण, रामसुभग, ओंकार पांडेय, रामनारायण, ज्योति, अमिता, रीता, सुषमा, मनी मौजूद रहे।