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कबीर को आमजनों का रहनुमा बताया

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शक्तिनगर। कबीर जयंती के उपलक्ष्य पर साहित्यिक संस्था सोन संगम की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कबीर के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें युग दृष्टा बताया। कहा कि कबीर समाज के रहनुमा थे। वक्ताओं ने कहा कि वह सिर्फ समाज सुधार या सामाजिक विसंगतियों की बात नहीं करते थे बल्कि पहले महापुरुष हैं जो त्याग, दया, करूणा, प्रेम, सौर्हाद की बात करते हुए गुरू और ईश्वर के मध्य विभाजन की रेख खींचते हुए गुरू को श्रेष्ठता प्रदान करते हैं।
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साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक मूल्यों के प्रति समर्पित संस्था %सोन संगम’ की ओर से सोमवार शाम आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता एनटीपीसी सिंगरौली के उप महाप्रबंधक नवीन चंद श्रीवास्तव ने किया। मुख्य अतिथि जीवन बीमा निगम शक्तिनगर के शाखा प्रबंधक पंकज श्रीवास्तव तथा मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य रमाकांत पांडेय मौजूद रहे। विषय की स्थापना करते हुए विद्यापीठ के प्राध्यापक डॉ. मानिकचंद पांडेय ने कहा कबीर आमजन के हितकारी थे। उनका उद्देश्य किसी का विरोध करना नहीं अपितु समाज में मानवीय मूल्यों की स्थापना करना था। उनके ऊपर बौद्ध सिद्धों एवं नाथ संप्रदाय का प्रभाव था। आचार्य रमाकांत पांडेय ने कबीर को सर्वहारा वर्ग का पक्षधर बताते हुए सर्वधर्म समभाव की सोच का महापुरूष बताया। मुख्य अतिथि पंकज श्रीवास्तव ने कहा जहां आज कल बौद्धिक चर्चा/परिचर्चा फेसबुक/ वाट्सप पर हो रही हो ऐसे में कबीर पर खुली चर्चा करना इस इक्कीसवीं सदी में उनकी प्रासंगिकता को साबित करती है। कबीर संत, भक्त, कवि , धर्मप्रचारक से ऊपर श्रेष्ठ मानव थे। विजय लक्ष्मी पटेल ने कहा कि कबीर ने तत्कालीन सामाजिक, धार्मिक कुरीतियों का पूरी ताकत से खंडन किया। अन्य वक्ताओं में उपेशचंद जायसवाल, विजय कुमार विश्वकर्मा, संयोगिता इत्यादि ने अपने विचार व्यक्त किए। इस कार्यक्रम में छोटु कुमार, उपेंद्र, मुकेश, संजय सिंह, जितेंद्र सिंह, सुरेंद्र कुमार लोहिया, रीता पांडेय, सौम्या के साथ काफी लोग मौजूद रहे।
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