केकराही। धंधरौल बांध से घाघर मुख्य नहर को पानी नहीं मिलेगा। इससे संबंधित क्षेत्रों के पशुपालकों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। किसानों को भी सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल सकेगा।
बता दें की चिलचिलाती धूप से सभी गांव के तालाब, पोखरे सूख गए हैं। इससे पशु-पक्षी पानी के लिए भटक रहे हैं। शासन के आदेश के अनुसार माह मई व जून में मुख्य नहर घाघर में धंधरौल बांध से पानी छोड़कर क्षेत्र के मधुपुर राजवाहा, घोरावल राजवाहा, शाहगंज राजवाहा सहित दर्जनों माइनरों करकी माइनर, जड़ेरूआ, पगिया, खैरपुर, सरौली और कर्मा माइनर से सैकड़ों गांवों के तालाब पोखरे भरे जाते हैं। मदार, भैरोपुर, बहेरा, जुरवट, असना, मचोलवा, पतेरी, बबुराही, भटौलिया, पिपरा, पगिया, सरौली, खैरपुर, कर्मा, करकी, बसदेवा, कसयां, बारी घेवरी, अतरवा आदि गांवों तक पानी किसानों को इन माइनरों से मिलता है। साथ ही गांवों के तालाब, पोखरे भी इसी से भरे जाते हैं। लेकिन इस वर्ष माह मई में तीन मई से 15 मई तक मुख्य नहर घाघर में पानी छोड़ा गया था, जो छह दिन सोनभद्र व छह दिन मिर्जापुर को मिला था। इसके बाद नहर बंद हो गई। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि महज छह दिन में तालाब, पोखरे कैसे भर पाएंगे। इसका सीधा असर पशु पक्षियों पर पड़ेगा। गांवों में लोगों को टैंकर से भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मुख्य नहर घाघर से संबंधित जेई अमित कुमार यादव ने बताया कि बंधे में पानी नही है। इससे जून के महीने में धंधरौल बांध से पानी नही मिल पायेगा। सोन पंप से पानी मिलेगा। क्षेत्र के मोहन, पारस, गुलाब, कन्हैया, रामभरोस, हंसराज, वंशराज, चंद्रहास, राजेंद्र मौर्य ने बताया कि लिफ्ट का एक दो पंप चलने से पानी नहर में नीचे ही रह जाता है। इससे माइनरों, राजवाहा में पानी नही जा पाता है। क्षेत्रीय लोगों ने सोनलिफ्ट के सभी पंप चलाकर पानी देने की मांग की है।