शाहगंज्र/रेणुकूट/अनपरा। राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट पर रविवार सुबह से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान शुरू हुआ, लेकिन तीन ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार कर दिया। सड़क, पेयजल जैसी समस्याओं को लेकर मतदान का बहिष्कार करने वाले ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। ओड़ौली के ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन व पुलिस से ने जबरन 13े लोगों के वोट डलवाए हैं। शेष किसी ने वोट नहीं डाला।
ग्राम पंचायत ओड़ौली के बूथ संख्या 282 पर 531 वोटर हैं। इसमें से 275 पुरुष और 256 महिला वोटर हैं। यहां के मतदाताओं ने तीन दिन पहले मतदान के बहिष्कार की घोषणा कर दी थी। इसकी जानकारी होने पर शनिवार रात तक यहां अधिकारियों ने पहुंचकर लोगों को समझाया था, लेकिन ग्रामीण कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुए।
रविवार सुबह पीठासीन अधिकारी रूप सिंह व अन्य कर्मी बूथ पर पहुुंचे। वे निर्धारित समय से बूथ पर वोटरों के आने का इंतजार करते रहे लेकिन एक भी वोटर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने गांव में प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उपेक्षा करने का आरोप लगाया। इसी बीच सीडीओ अजय कुमार द्विवेदी, डीएसओ राकेश तिवारी, बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल, बीडीओ राबर्ट्सगंज प्रभात द्विवेदी व वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण नहीं मानें। इसके बाद एसडीएम सदर फोर्स के साथ पहुंच गए। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने जबरजस्ती आठ से दस लोगों से वोट दिलवाया।
रेणुकूट: मुर्द्धवा ग्राम पंचायत के धौकीनाला टोले के ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 72 वर्ष बाद भी गांव में संपर्क मार्ग नहीं बना है और ना ही बिजली के दर्शन हो सके हैं। 250 वोटरों वाले इस टोले के ग्रामीणों ने एक पखवारे पूर्व ही बैठक कर मतदान न करने का फैसला किया था। रविवार को ग्रामीणों ने एकजुट होकर मतदान न करने का फैसला किया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनके गांव में विकास नहीं होगा तब तक वह वोट नहीं डालेंगे।
अनपरा: ग्राम कुलडोमरी के टोला बूथ बड़हरा के ग्रामीणों ने भी मतदान का बहिष्कार कर दिया। यहां दोपहर 12 बजे तक महज नौ वोट पड़े। मतदाताओ का आना जाना बेद देख पीठासीन अधिकारियों ने इसकी सूचना प्रशासन को दिया। मौके पर एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह, एएसपी अरुण कुमार दीक्षित व पुलिस पहुंची। यहां ग्रामीणों को काफी समझाया गया लेकिन मतदाता वोट देने के लिए तैयार नहीं हुए। ग्रामीणों का कहना था कि जब सड़क, बिजली, पानी व शिक्षा की ब्यवस्था का समाधान होता तभी वोट पड़ेगा। इसके पहले 28 अप्रैल 2019 को यहां के ग्रामीणों ने वोट के बहिष्कार का निर्णय किया था। लेकिन तब अधिकारियों ने कोई सुधि नहीं ली थी।