बच्चों की स्कूल फीस को लेकर चिंतित अभिभावकों के लिए अच्छी खबर है। कैबिनेट में उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का निर्धारण) अध्यादेश 2018 को हरी झंडी मिलने के बाद निजी स्कूल मनमाना फीस नहीं वसूल सकेंगे। इस अध्यादेश के आने से निजी स्कूल प्रबंधकों की नींद उड़ गई है वहीं अभिभावक भी खुश है। लेकिन अभी तमाम स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है और इस अध्यादेश के आने के बाद विद्यालय प्रबंधन के रूख का इंतजार है । जिले में अंग्रेजी माध्यम 60 फीसद स्कूलों में 20 हजार से अधिक सालाना फीस की वसूली एक छात्र से की जा रही है।
कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद इस अध्यादेश के दायरे में वे स्कूल आ जाएंगे जो 20 हजार रुपये सालाना से अधिक फीस वसूल करते है। यह अध्यादेश सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड समेत सभी शिक्षा क्षेत्र से जुड़े स्कूलों पर लागू होगा। स्कूल प्रबंधन ड्रेस भी पांच साल तक नहीं बदल सकेंगे। सालाना सात-आठ फीसदी से ज्यादा फीस में इजाफा नहीं कर सकेंगे। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर भी यह अध्यादेश लागू होगा। इसके अलावा तय दुकान से किताब व कापी, स्कूल ड्रेस आदि खरीदने का भी दवाब स्कूल प्रबंधन नहीं डाल सकेगा। शुल्क पर नियंत्रण रखने के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में मंडलीय शुल्क नियामक समिति का गठन होगा। ताकि निजी स्कूलों की फीस पर की जा रही मनमानी पर अंकुश लग सके।
25 से 40 हजार रुपये सालाना वसूली
सोनभद्र। अंग्रेजी माध्यम स्कूल में 11 वीं के छात्र से बीते शिक्षा सत्र में शिक्षण शुल्क व अन्य मद में सालाना 39 हजार रुपये की वसूली की गई है। जिसमें दो हजार रुपये प्रवेश शुल्क, वार्षिक विकास के मद में 13 सौ रुपये, शिक्षण शुल्क के मद में 72 सौ रुपये, स्कूल भवन फंड में पांच सौ रुपये, परीक्षा शुल्क मद में ढाई सौ रुपये, इलेक्ट्रिक के नाम पर 12 सौ रुपये अप्रैल माह में प्रवेश के वक्त लिया गया है। किताब-कापी व अन्य सामान फीस में शामिल नहीं है।
बोले प्रधानाचार्य...
डीएवी पब्लिक स्कूल अनपरा के प्रधानाचार्य बीके सिंह के मुताबिक उनके स्कूल में सालाना छह प्रतिशत फीस में इजाफा किया जाता है। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन आवश्यक व जरूरत भर ही अन्य शुल्क वसूल करता है। अध्यादेश आने के बाद यदि मानक से अधिक होगी तो उसे छात्रों को वापस किया जाएगा। संत जोसेफ कांवेंट स्कूल शक्तिनगर के प्रधानाचार्य वाल्टर डिसिल्वा के मुताबिक सरकार द्वारा तय मानक के अनुसार ही फीस ली जाएगी। चालू शिक्षा सत्र में यदि मानक से अधिक फीस लिया गया है तो उसे वापस भी किया जाएगा। डीएवी राबर्ट्सगंज के प्रधानाचार्य राजकुमार ने कहा कि इस मामले में अभी कुछ भी बोलना जल्दबाजी होगी। डीएवी स्कूल एक संस्था से संचालित होता है और संस्था के उत्ताधिकारियों का निर्णय क्या होगा, वह आने वाला समय भी बताएगा।
शिकंजा कसने से अभिभावक गदगद
कैबिनेट में उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का निर्धारण) अध्यादेश 2018 पास होने के बाद अभिभावक खुश हैं। राबर्ट्सगंज निवासी राजकुमार साहनी, रमेश सिंह, संजय पाल, अनपरा निवासी बृजेश दूबे, रमाशंकर तिवारी, शोभनाथ व अमित दूबे ने कहा कि इस अध्यादेश के लागू होने से निजी स्कूल मनमाना फीस नहीं वसूल सकेंगे। यह िअध्यादेश पूर्व की सरकारों को लाना चाहिए था। हालांकि अभिभावकों ने यह भी आशंका व्यक्त की कि इसे लागू कराने में प्रशासनिक दबाव की जरूरत है तभी सराकर की मंशा कामयाब हो सकेगी।