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खाद, बीज, कृषि उपकरणों के लिए नहीं होगी परेशानी

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सोनभद्र। जनपद के करीब दो लाख तीन हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि होने के बावजूद महज 55 हजार हेक्टेयर भूमि ही सिंचित है। इससे जिले में कृषि उत्पादन काफी कम है। अब कृषि क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देकर उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सरकार ने नई पहल की है। इसके तहत अब जनपद में कृषि उत्पादक समूह (एफपीओ) का गठन होगा। इन समूहों को सरकार की योजनाओं के क्रियान्यवन में प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि समूह बेतहर उत्पादन के साथ आर्थिक उन्नति कर सकें।
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भौगोलिक दृष्टि से काफी दुरूह सोनभद्र में कहने को कई नदियों के साथ पहाड़ी नदी, नाले हैं, लेकिन यहां सिंचाई की सुविधा अब भी किसानों को मयस्सर नहीं है। यही वजह है कि महज 55 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि ही सिंचित क्षेत्रों में शामिल है। शेष करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर जमीन परती पड़ी हुई है। इससे किसानों में मायूसी रहती है। वर्षा पर आधारित कृषि होने के नाते यहां के किसानों की माली हालत बदहाल होती है। हालांकि जनपद में सोन पंप के विस्तारीकरण और कनहर सिंचाई परियोजना के निर्माण का कार्य चल रहा है। घोरावल ब्लॉक मेें भी तालाबों का निर्माण हो रहा है। इससे आने वाले दिनों में यहां पर कृषि और उससे जुड़े रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस उम्मीद को आगामी दिनों में बनने वाले कृषि उत्पादन समूह से भी बढ़ावा मिलेगा। जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया कि जनपद में किसानों का कृषि उत्पादन समूह गठित होगा। इसमें किसान अपनी स्वेच्छा से सदस्य बनाकर समूह गठित कर सकते हैं। इसका पंजीकरण को-आपरेटिव सोसाइटी या फिर कंपनी एक्ट के तहत होगा। इन समूहों को केंद्र और प्रदेश सरकार की कृषि एवं सिंचाई के क्षेत्र में चलनी वाली योजनाओं मेें प्राथमिकता दी जाएगी।
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