ओबरा। नगर पंचायत ओबरा के ज्यादातर वार्डों के तापीय परियोजना कालोनी में होने के कारण यहां अपेक्षित विकास नहीं हो सका है। यह मानना नपं के वासियों का है। कहना है कि परियोजना व नपं प्रशासन के बीच तालमेल की कमी का विकास पर विपरित प्रभाव पड़ा है। यही वजह है कि नये अध्यक्ष को तालमेल बैठा कर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
नगर पंचायत ओबरा में मौजूदा समय में 18 वार्ड हैं। पिछले पंचवर्षीय में यहां 20 वार्ड थे। उस वक्त यह प्रदेश की सबसे बड़ी नगर पंचायत में शामिल थी। इस नगर पंचायत में करीब 25 किलोमीटर लंबी सड़कों का जाल है लेकिन तमाम सड़कें गड्ढे में भी तब्दील हैं। परियोजना के आवासीय परिसर के वार्ड में शामिल होने के कारण नपं प्रशासन विकास कार्य के लिए परियोजना प्रशासन को निहारता है। यही हाल परियोजना प्रशासन की है। जिसकी वजह से दो पाट में वहां का विकास फंस कर रहा गया है। इस नपं में 760 एलईडी, 20 हाईमास्ट, 190 सोलर सेमी हाईमास्ट, 300 सोडियम लाइट के अलावा 417 हैंडपंप, चार सार्वजनिक शौचालय, एक स्वचालित शौचालय, पांच टैंकर, एक ट्रांसफार्मर, एक फागिंग मशीन, एक जेसीबी, एक मैजिक, दो कूड़ा उठाने के लिए आटो, चार ट्रैक्टर ट्राली भी है। नगर पंचायत का 70 लाख रुपये मासिक बजट है जो राज्य वित्त आयोग से मिलता है। इसके अलावा 1.5 करोड़ रुपये सालाना 14 वां वित्त का फंड मिलता है। नगर पंचायत में कुल 22 कर्मचारी हैं। संविदा पर 135 सफाई कर्मी भी नियुक्त हैं। इतना बड़ा संसाधन व मैन पावर के अतिरिक्त भारी भरकम बजट के बावजूद इस ग्राम पंचायत में अब तक हुए विकास कार्य लोगों के गले नहीं उतर रहा है।
नये अध्यक्ष की चुनौती - नगर पंचायत ओबरा में विकास कार्य को लेकर नगरवासी चितिंत हैं। विकास कार्य के नाम पर अनियिमतता की भी शिकायत है। यहां सबसे बड़ी चुनौती परियोजना प्रशासन से सामंजस्य बैठाकर नगर में विकास कार्य कराना है। पूर्व में इसकी कमी रही और परियोजना कालोनी में कार्य नहीं हो सके।