बीजपुर(सोनभद्र)। छत्तीसगढ़ से निकल कर रिहंद जलाशय में गिरने वाली अजीर और नेमना नदी के सुख जाने से पानी का संकट गहरा गया है। मवेशियों और जंगली जानवरों के सामने पीने के पानी का संकट पैदा हो गया है। पानी की तलाश में जंगली जानवर बस्तियों की तरफ रुख करने लगे हैं। इससे ग्रामीणों को जंगली जानवरों का खौफ भी सताने लगा है।
छत्तीसगढ़ के रमप्पा कूरर से निकली अजीर नदी बचरा, सिंदूर, लीलादेवा, कोहमरा, नीमडाड़, जरहां, दिघुल होते हुए रिहंद जलाशय में समाहित होती है। मई के शुरुआती दिनों में ही यह नदी पूरी तरह से सूख गई है। इसी नदी से नेमना नदी निकली है जो बीजपुर क्षेत्र के कई गांव के टोलों से होते हुए रिहंद जलाशय में गिरती है। इन दोनों नदियों से करीब 20 हजार आबादी की पानी की जरूरत पूरी होती है। इन नदियों के सूख जाने से गांवों और जंगलों में हालात बिगड़ गए है। इंसान तो चुआड़ खोदकर और हैंडपंपों से पानी प्राप्त कर ले रहा लेकिन मवेशी व जंगली जानवरों के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है। यही वजह है कि प्यास से परेशान जंगली जानवर बस्तियों की तरफ रुख कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत है।