चंद्रग्रहण के चलते बुधवार को जिले में मंदिरों के कपाट सुबह के पूजन-अर्चन के बाद ही बंद कर दिए गए। शाम को जैसे ही ग्रहण शुरू हुआ, लोग भजन, मंत्रजाप, साधना में जुट गए। शाम पांच बजे शुरू हुआ भजन-साधना का क्रम रात पौने नौ बजे तक बना रहा। ग्रहण के बाद पहले वस्त्रों सहित लोगों ने स्नान किया। इसके बाद चंद्रदर्शन कर मंगल की कामना की।
चंद्रग्रहण को लेकर सूतक सुबह सवा आठ बजे ही लग गया था। इसको देखते हुए सुबह मंदिरों में पूजन-अर्चन के बाद पट बंद कर दिए गए। ग्रहण को लेकर जरूरी एहतियात भी बरते जाते रहे। शाम करीब सवा पांच बजे चंद्रोदय के समय से ही ग्रहण काल शुरू हो गया। इसके साथ ही लोगों ने अन्न-जल का पूरी तरह त्याग कर भजन-कीर्तन के साथ ही गुरुमंत्र, इष्टमंत्र, भगवान्नाम का जाप शुरू कर दिया। कई लोगों ने मंत्र साधना भी की। राबर्ट्सगंज में वीरेश्वर महादेव मंदिर, मां शीतला मंदिर, डाला में मां वैष्णो धाम, ओबरा में मां शारदा धाम, शक्तिनगर स्थित मां ज्वालामुखी धाम, रेणुकापार स्थित कुड़ारी धाम आदि प्रमुख मंदिरों के भी कपाट पूरी तरह बंद रहे। कहीं ग्रहण लगन से पहले तो कहीं ग्रहण के समय से लोगों ने घरों में या फिर मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन शुरू किया। यह क्रम देर रात तक बना रहा। रात नौ बजे तक लोगों ने स्नान और चंद्रदर्शन की प्रक्रिया पूरी की।