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सौ किलोमीटर दूर पोस्टमार्टम व्यवस्था से रोष

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शक्तिनगर(सोनभद्र)। ऊर्जांचल भले ही उन्नति की शिखर को छू रहा हो लेकिन दुर्घटना में किसी की मौत के बाद परिवारीजन जो असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ती उसका अंदाजा न तो जनप्रतिनिधियों को है ना ही प्रशासन के जिम्मेदार को। वजह आजादी के 65 साल बाद भी शवों को पोस्टमार्टम के लिए सौ किलोमीटर दूर दुद्धी ले जाने का है। इस अव्यवस्था को समाप्त करने के लिए अब मांग मुखर होने लगी है।
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परियोजना उद्वासित श्रमिक संगठन ने पूरे मामले पर डीएम समेत शासन को पत्र लिख इस बदइंतमामी से आम लोगों को होने वाली परिशानी का जिक्र करते हुए अनपरा के डिबुलगंज इलाके में स्थित संयुक्त चिकित्सालय में शवों के पोस्टमार्टम की व्यवस्था करने की मांग किया है। संगठन के महामंत्री रामकरण चौबे ने इलाके में आबाद केंद्रीय व राज्य सेक्टर के प्रोजेक्टों के साथ निजी उद्योगों व आबादी का जिक्र करते हुए कहा है कि पोस्टमार्टम व्यवस्था से मृतक परिजन व स्वजनों के दुख अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विपत्ति के वक्त शव के साथ पूरी औपचारिेकता पूरी करने में कैसे एक से दो दिन गुजारने पड़ते है। दूरी तय करने व नियमों को पूरा करने में शवों में कई तरह की विकृतियां पैदा हो जाती है। स्वयं सेवी संस्था एविडेंस के जनरल सेके्रटरी कुमार अविनाश ने पूरे मामले पर सीएम को पत्र लिखा है। श्री कुमार का कहना है कि विकास के तरफ तेजी से अग्रसर इस इलाके में शवों का परीक्षण कराना बेहद पेंचीदा काम हो गया है। इससे होने वाली पीड़ा को आसानी से समझा जा सकता है। भाजपा नेता केसी शर्मा का कहना था कि इस अव्यवस्था को दूर कराने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जाएगा। संवेदनहीनता के लिए पिछली सरकारों को दोषी बताते हुए श्री शर्मा कहते है कि जल्द अनपरा में शव परीक्षण का इंतजाम हो इसके लिए जो कुछ जरूरी हो किया जाएगा।
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