राबर्ट्सगंज तहसील के चोपन ब्लॉक के पूर्वी क्षेत्र कोन में संचालित एकलौता राजकीय इंटर कालेज कोन में विगत कई वर्षों से एक प्रभारी प्रधानाचार्य के सहारे करीब 1250 बच्चों का भविष्य टिका है। यह राजकीय इंटर कालेज विगत कई वर्षों से अध्यापक विहीन है। अब जबकि बोर्ड की परीक्षा सिर पर है, बच्चों अभिभावकों को परीक्षा के तैयारी की चिंता सताने लगी है।
जब भी चुनाव आता है तो इंटर कालेज में अध्यापकों की नियुक्ति को लेकर ग्रामीण आवाज उठाते रहते हैं। तमाम पार्टियों के प्रत्याशियों द्वारा आश्वासन भी दिया जाता है लेकिन चुनाव बितते ही मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। करीब एक वर्ष पूर्व दिव्यांग समारोह में भाग लेने कोन में आये सूबे के उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा से क्षेत्रवासियों ने मांगपत्र सौंपकर शिक्षकों के तैनाती की मांग की थी। उन्होंने जल्द ही वैकल्पिक शिक्षक नियुक्ति करने का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक कोई प्रक्रिया शुरू नही हुई। उनके आने के बाद अब दूसरी बार बोर्ड परीक्षा होने वाली है, जिसे लेकर क्षेत्र के छात्रों व अभिभावकों में चिंता है। क्षेत्र मे एकलौता राजकीय इंटर कालेज होने के नाते गरीब अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन तो करा देते हैं, लेकिन फिर बच्चों के समक्ष पढ़ाई का संकट खड़ा हो जाता है। एक भी शिक्षक न होने से बच्चे और उनके अभिभावक परेशान हैं कि बगैर तैयारी के कैसे परीक्षा में बैठ सकेंगे। बता दें कि कोन के अलावा दुद्धी या ओबरा में राजकीय इंटर कालेज है, जो यहां से 40 से 50 किमी दूर है। कोन इंटर कालेज में कक्षा छह से 12 तक के कक्षाओं मे वर्तमान वर्ष में कुल 1250 छात्र-छात्राएं अध्यनरत हैं। यहां तैनात प्रभारी प्रधानाचार्य विश्वनाथ ने बताया कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए अभिभावकों के साथ बैठक कर अभिभावकों के सहयोग से विषयवार प्राइवेट शिक्षक को रखकर पढ़ाई कराई जा रही है। शासन से अध्यापकों की मांग की गयी है। बता दें कि विद्यालय में एक प्रधानाचार्य के अलावा एक वरिष्ठ लिपिक व सात चतुर्थ क्षेणी के कर्मचारी कार्यरत हैं। जबकि विद्यालय में 12 प्रवक्ता व 20 एलटी ग्रेड के शिक्षक के सापेक्ष एक अध्यापक के सहारे 1250 बच्चों का भविष्य टिका है।