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निजीकरण का विरोध करने वाले राजनीतिक दल का बिजली कर्मचारी करेंगे समर्थन

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अनपरा (सोनभद्र)। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने शनिवार को लखनऊ स्थित कार्यालय में एक बैठक कर पुरानी पेंशन बहाली व निजीकरण का विरोध करने वाले राजनीतिक दल का आगामी लोकसभा चुनाव में समर्थन करने का निर्णय लिया है। जिसमें देश के दो करोड़ बिजली कर्मी व उनके परिवार समर्थन करेंगे।
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बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दल जो लोक सभा चुनाव से पहले जारी किए जाने वाले अपने घोषणा पत्र में बिजली क्षेत्र और बिजली कर्मचारियों से संबंधित महत्वपूर्ण ज्वलंत विषयों को शामिल करते है, तो आगामी लोक सभा चुनाव में उसी दल को वोट बिजली कर्मचारी व उनके परिजन करेंगे। उल्लेखनीय है कि बिजली के क्षेत्र में पूरे देश में लगभग 15 लाख नियमित कर्मचारी एवं 10 लाख संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं और लगभग 15 लाख पेंशनर बिजली कर्मी हैं। इन सबके परिवार सहित लगभग दो करोड़ बिजली कर्मी व उनके परिवार के लोग मतदाता हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से सभी प्रमुख राजनैतिक दलों के राष्ट्रीय व प्रांतीय अध्यक्षों को पत्र भी लिखा गया है। संघर्ष समिति की ओर से उठाये गये मुख्य मुद्दों में पुरानी पेन्शन बहाली, बिजली निगमों का एकीकरण कर राज्य विद्युत परिषद निगम लि का गठन कर निजीकरण की नीति समाप्त करना और संविदा/ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर तेलंगाना सरकार की तरह सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित करना मुख्य विषय है। बैठक में शैलेंद्र दुबे, राजीव सिंह, गिरीश पांडेय, सदरुद्दीन राना, सुहैल आबिद, विपिन प्रकाश वर्मा, राजेंद्र घिल्डियाल, महेंद्र राय, मो. इलियास, करतार प्रसाद, अमित श्रीवास्तव, शशिकांत श्रीवास्तव, परशुराम, पीएन राय, पूसे लाल, एके श्रीवास्तव, केएस रावत, अमिताभ सिन्हा, सागर शर्मा, आरएस वर्मा, डीके मिश्रा, पवन श्रीवास्तव, शंभू रत्न दीक्षित, कुलेंद्र प्रताप सिंह आदि थे।
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