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संशोधित...फ़्लोरासिस प्रभावितों की तेजी से घट रही औसत आयु

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सोनभद्र/विंढमगंज। फ्लोरोसिस प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की औसत उम्र तेजी से घट रही है। इससे प्रभावित कई लोग जिंदगी-मौत के बीच जूझ रहे हैं। राष्ट्रीय औसत 70 वर्ष के मुकाबले फ्लोराइड प्रभावित की महज 25 से 50 वर्ष के उम्र में होती मौतों से हड़कंप मचा हुआ है। जिले में सबसे पहले फ्लोरोसिस प्रभावित बस्ती के रूप में सामने आए निरुइयादामर टोले में इस माह भी एक मौत का मामला सामने आया है। नवंबर से अब तक इस टोले में 13 की मौत से ग्रामीणों की नींद उड़ी हुई है।
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चोपन ब्लाक के कचनरवा ग्राम पंचायत में 22 टोले हैं। इसमें रोहनियादामर, निरुइया दामर, शिकारी खोली और मधुरी खोली टोले फ्लोरोसिस से प्रभावित हैं। इसमें सबसे खराब स्थिति रोहनियादामर की है। इस गांव में करीब-करीब प्रत्येक माह फ्लोरोसिस के चलते किसी न किसी की मौत हो रही है। हालिया आंकड़ा नवंबर से अब तक का है। ग्रामीण बताते हैं कि महज रोहनियादामर टोले में नवंबर में नवंबर माह में नरेश धांगर (32), दिसंबर माह में शिवदास चेरो (45), मंगरु (31), गजाधर भुइयां (29), किस्मतिया देवी (23) पत्नी सीता राम, रामदास (50), अनारा देवी (55) पत्नी मनी भुइयां, जनवरी माह में विजय (27), झंडू राम (55), अवधेश चेरो (49), भगत चेरो (48), सरिया देवी (50) पत्नी रामजीत की मौत हो चुकी है। वहीं सप्ताह भर पूर्व विनय कुमार (27) की मौत भी ग्रामीणों को रुआंसा किए हुए है। प्रभावितों का इलाज भी बुखार-दर्द के टेबलेट तक सिमटा हुआ है।
उधर, कचनरवा प्रधान उदय प्रसाद भी मौतों की पुष्टि करते हैं। कहते हैं कि फ्लोरोसिस की बीमारी लगातार लोगों को चपेट में ले रही है। इस माह ही एक मौत हुई है। 25 से 30 लोग अभी भी उनके यहां मौत से जूझ रहे हैं। बताया कि रोहनियादामर में लगा फ्लोराइड रिमूवल प्लांट भी लंबे समय से खराब पड़ा है। उनके गांव में पाइपलाइन से पेयजल की भी कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। पिछले दिनों सर्वे के लिए एक टीम आई थी, जिसे सारी जानकारी दी गई है। रिमूवल प्लांट के भी संचालन के लिए गुहार लगाई जा चुकी है।
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फ्लोरोसिस प्रभावितों की औसत उम्र में तेजी से गिरावट आने की बात सही है। वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। क्योंकि सिर्फ लक्षणों के आधार पर ही उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। इसका सही निदान शुद्ध पेयजल की आपूर्ति है। - एसपी सिंह, सीएमओ, सोनभद्र।
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550 फ्लोराइड रिमूवल प्लांटों के रखरखाव की व्यवस्था कराने के लिए इस्टीमेट भेजा जा चुका है। बजट मिलने के बाद ही बंद या खराब पड़े प्लांटों का संचालन शुरू हो पाएगा। - हिमांशु यादव, एक्सईएन, जल निगम।
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गंभीर मसला है। ओवरसाइट कमेटी को स्थितियों की जानकारी दी जा चुकी है। - एके आनंद, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी।
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