सोनभद्र। जिला अस्पताल परिसर में करीब एक करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ दस बेड का ट्रॉमा सेंटर भवन बेकार पड़ा है। इस भवन में अब भी ताला लटका हुआ है। इसका लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। जबकि आए दिन यहां सड़क हादसे में लोग घायल होते रहते हैं और उन्हें ट्रॉमा सेंटर की जरूरत पड़ती है। ऐसे में मरीजों को वाराणसी के ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। इससे लोगों में असंतोष है।
जिले की करीब 18 लाख की आबादी के उपचार के लिए शासन स्तर से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन सारी कवायदें जमीन पर उतर कर फेल हो जा रही हैं। दूरस्थ ग्रामीण इलाकों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का सही मायने में फायदा नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल परिसर में पिछली सपा सरकार में करीब एक करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से दस बेड का ट्रॉमा सेंटर बना। तब जिले के लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब सड़क हादसे में घायल होने वालों को वाराणसी ट्रॉमा सेंटर नहीं जाना होगा और जिला अस्पताल परिसर में ही बने ट्रॉमा सेंटर में ही आसानी से उपचार हो जाएगा। लेकिन करीब तीन वर्ष बीतने के बावजूद यह अस्पताल चालू नहीं हो सका। इसका खामियाजा अब भी जिले के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में वर्तमान में चार आर्थोपेडिक सर्जन और एक एनेस्थेटिक्स की तैनाती है। इन डॉक्टरों द्वारा जिला अस्पताल के ही ऑपरेशन थियेटर में हड्डियों से जुड़ा ऑपरेशन भी किया जाता है। फिर भी ट्रॉमा सेंटर का चालू न होना तमाम तरह के सवालों को खड़ा कर रहा है। हालांकि ट्रॉमा सेंटर को चालू करने में पैरामेडिकल स्टाफ की कमी, अन्य सुविधाएं भी आड़े आ रही हैं लेकिन आखिरकार कब यह अस्पताल संचालित होगा, इसको लेकर संशय की स्थिति बन गई है। बता दें कि पूर्व में सपा के जिला सचिव प्रमोद यादव की अगुवाई में कई बार सपा कार्यकर्ता ट्रॉमा सेंटर चालू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। सीएमओ डा. एसपी सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल परिसर में स्थित ट्रॉमा सेंटर में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। स्टाफ की कमी के साथ ही इंस्ट्रूमेंट्स की भी कमी है। कुछ सामान अभी आने शेष रह गए हैं। इसलिए सेंटर संचालित नहीं हो पा रहा है। शासन स्तर पर इसको लेकर पत्राचार हो चुका है। सुविधाएं मिलते ही ट्रॉमा सेंटर संचालित करा दिया जाएगा।