प्रदेश के पांच शहरों के फ्रेंचाइजीकरण को लेकर बिजली कर्मियों का विरोध प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर 27 मार्च को कार्य बहिष्कार की सूचना दी। वक्ताओं ने बताया कि मुख्य सचिव ने इस बाबत जारी सर्कुलर में सामान्य लोकतांत्रिक विरोध को हड़ताल बताकर दमनात्मक कार्यवाही आदि के आदेश जारी कर दिए हैं । जिससे बिजली निगमों में कार्य का माहौल खराब हो रहा है । संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को सूचित कर दिया है कि ऐसे माहौल में 23 मार्च को पावर कारपोरेशन के चेयरमैन की वीडियो कांफेंसिंग का बहिष्कार किया जाएगा। वक्ताओं ने पांच शहरों के फ्रेंचाइजीकरण की नीति और नीयत पर सवाल खड़ा करते हुए दावा किया कि जिन पांच शहरों के निजीकरण का फैसला लिया गया है, उन शहरों में बिजली राजस्व में वृद्धि और मिलने वाला राजस्व आगरा फ्रेंचाइजी टोरेंट से मिलने वाले राजस्व से अधिक है। ऐसे में सरकार को यह बताना चाहिए कि इन शहरों के निजीकरण का आधार क्या है । बिजली कर्मियों ने बिजली बेचने वाली निजी कंपनियों रिलायंस, बजाज, लैंको, जेपी, जीवीके आदि का भी सीएजी आडिट कराये जाने की मांग की है।