सोनभद्र। यूपी सरकार के शुक्रवार को पेश हुए आम बजट में सोनभद्र को भी सौगात मिली है। बार्डर एरिया डेवलपमेंट कार्यक्रम के लिए सरकार ने करीब 57 करोड़ रुपये देने का एलान किया है। इससे चार राज्यों से घिरे सोनभद्र में विकास की उम्मीद है। करीब 40 साल से निर्माणाधीन कनहर सिंचाई परियोजना के लिए पांच सौ करोड़ रुपये और चुुर्क में संचालित राजकीय इंजीनियरिंग कालेज के लिए सरकार ने ढाई करोड़ रुपये दिया है। इससे जिले में विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
सोनभद्र में बन रही कनहर सिंचाई परियोजना के निर्माण के लिए पांच सौ करोड़ रुपये अपने बजट में दिया है। इससे वर्षों से अधूरी पड़ी इस परियोजना के निर्माण को गति मिलेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि वर्ष 2019 तक परियोजना का निर्माण पूर्ण हो जाएगी।
परियोजना पर एक नजर डालें तो वर्ष 1976 मेें तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने कनहर सिंचाई निर्माण के लिए शिलान्यास किया था। तब परियोजना की लागत सिर्फ 27 करोड़ रुपये ही थी। लेकिन जब निर्माण कार्य शुरू हुआ तो इसका बजट बढ़ता गया। फिलहाल इस परियोजना की लागत 2239 करोड़ रुपये की है। इसमें से परियोजना को 1235.55 करोड़ रुपये मिला था। शुक्रवार को यूपी सरकार ने पांच सौ करोड़ रुपये और दिया है। फंड न मिलने से करीब एक माह तक कार्य की गति काफी धीमी थी। अब कार्य तेज होगा। हालांकि नाबार्ड से भी परियोजना को ऋण स्वीकृत हो गया है। ऐसे में अब परियोजना के निर्माण में किसी तरह की बाधा आने की आशंका नहीं है। इस परियोजना के पूर्ण होने से यूपी के 108 गांवों में सिंचाई की सुविधा होगी, जिससे क्षेत्र के किसान खुशहाल हो जाएंगे। रिजर्व वायर बनने पर छत्तीसगढ़ और झारखंड के आसपास के गांवों के किसानों को भी परियोजना का लाभ मिलने की उम्मीद है। परियोजना के निर्माण से सोनभद्र के 11 गांव डूब क्षेत्र में आए हैं। यहां के 1044 मूल परिवार विस्थापित हुए हैं।
चुर्क में पुलिस लाइन के पास इंजीनियरिंग कालेज का निर्माण हुआ है। पिछले साल से यह संचालित हो रहा है। लेकिन कालेज में अंदर सड़क का निर्माण, बाउंड्री वाल का निर्माण नहीं हो सका है। इससे जंगली क्षेत्र से जानवर भटक कर अक्सर कालेज के पास पहुंच जाते हैं। इससे विद्यार्थी सहम जाते हैं। अब सरकार ने कालेज को ढाई करोड़ दिया है। इससे कालेज प्रशासन बाउंड्री वाल का निर्माण करायेगा ताकि सुरक्षा का खतरा खत्म हो जाए।
समाजवादी पार्टी के पिछले शासनकाल में चुर्क में राजकीय इंजीनियरिंग कालेज का निर्माण हुआ था। तब इस कालेज के निर्माण के लिए 104 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। आधे-अधूूरे बजट से कालेज का निर्माण कराकर इसका संचालन शुरू कर दिया गया। कालेज परिसर के अंदर सिवर ट्रीटमेंट प्लांट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रिटेनिंग वाल, कलवर्ट, प्ले ग्राउढड के साथ ही कालेज का बाउंड्री वाल का निर्माण अब तक नहीं हो सका है। बाउंड्री वाल ने होने से आये दिन जंगली जानवर भटक कर कालेज की ओर पहुंच जाते हैं। इससे विद्यार्थियों में भय बना रहता है। अक्सर विद्यार्थी कालेज कैंपस के बाहर निकलने से कतराते हैं। ऐसे में शुक्रवार को अपने बजट में यूपी सरकार ने इंजीनियरिंग कालेज को जो धन दिया है, वह कालेज के लिए राहत भरा है। इंजीनियरिंग कालेज के डायरेक्टर डॉ. विनोद कुमार गिरि ने बताया कि शासन ने करीब ढाई करोड़ रुपये का बजट दिया है। इससे कालेज में पहले बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जाएगा। फिर धन बचा तो परिसर के अंदर की कच्ची सड़कों को बनवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक कालेज को 61.5 करोड़ रुपये मिला है।
बार्डर एरिया डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत 57 करोड़ रुपये का प्राविधान अपने बजट में किया है। बार्डर एरिया में सोनभद्र भी आता है, इससे जिले के विकास के लिए भी बजट मिलने की उम्मीद है। सीमा से सटे गांवों में इससे विकास के नए कार्य होने की उम्मीद है।
सोनभद्र यूपी का आखिरी जिला है और छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश व बिहार की सीमा से सटा हुआ है। कभी इस जिले में नक्सल गतिविधियां चरम पर थीं। लेकिन सरकारों के विभिन्न कार्यक्रमों के संचालन के बाद इसमें काफी हद तक कमी आई और वर्तमान में यहां नक्सल गतिविधियां शून्य हैं। सीमा से सटे गांवों में अब भी विकास कार्य उस गति से नहीं हो सके हैँं, जैसे होने चाहिए थे। बिहार की सीमा से सटे नगवां ब्लॉक के करीब दर्जन भर ऐसे गांव ऐसे हैं, जहां तक पहुंचने में लोगों को परेशानी होती है। चरगड़ा गांव जाने से पहले नयनदह नदी है, जिस पर अस्थायी पुल का निर्माण हुआ है। हर वर्ष बारिश में यह पुल बह जाता है जिससे चरगड़ा गांव के लोग पूरी तरह से घिर जाते हैं। फिर उन्हें बिहार की सीमा का ही सहारा लेना पड़ता है। इसी तरह चारो ओर से पहाड़ों से घिरा चौरा गांव भी विकास के मामले में अछूता है। बार्डर के तमाम गांवों में अब भी पिछड़ेपन के हालात हैं। यदि यूपी सरकार ने बार्डर एरिया डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत सोनभद्र में विकास कार्य कराया तो यहां को बार्डर के गांवों को भी काफी लाभ मिल सकता है।