सोनभद्र। डाला छठ व्रत के दूसरे दिन महिलाएं दिन भर निर्जला व्रत रखीं और शाम को छठ घाटों पर बनी वेदी पर दीपक जलाकर पूजन-अर्चन किया। नदियों, जलाशयों और तालाबों में व्रतियों ने सूर्यास्त से पहले थाला बनाया और छठी मैया की पूजा अर्चना करते हुए मिन्नतें मांगी। रात्रि में व्रतियों ने खरना का प्रसाद बनाकर छठ माता को चढ़ाया और फिर प्रसाद ग्रहण किया। घाटों पर श्रद्धालुओं की ओर से रोशनी, पेयजल, जलपान आदि की व्यवस्था की गई है। छठ मइया की गीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया है।
जिले में सांय करीब चार बजे व्रती महिलाएं छठ मइया का गीत गाते हुए घाटों पर पहुंचने लगी थी। शाम ढलते ही व्रतियों ने अपने-अपने वेदी पर दीपक जलाकर पूजन-अर्चन किया। गन्ने के रस में बने चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी का प्रसाद भगवान सूर्य को अर्पित किया। दीपक से घाट जगमगा गए थे। गुरुवार की शाम में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ दिया जायेगा। महापर्व का समापन शुक्रवार को व्रतियों द्वारा उदीयमान सूर्यदेव को अर्घ देने के साथ होगा। राबट्र्सगंज के राम सरोवर, अकड़हवा पोखरा, बढ़ौली तालाब और मेहुड़ी नहर पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। विण्ढमगंज: स्थानीय सूर्य मंदिर पर गुरुवार को महाआरती होगी। इसमें सूबे के कारागार व लोक प्रबंधन मंत्री जय कुमार सिंह जैकी, दुद्धी विधायक हरिराम चेरो, सदर विधायक भूपेश चौबे, झारखंड के भवनाथपुर के विधायक भानु प्रताप साही व पूर्व विधायक रूबी प्रसाद शामिल होंगी। महाआरती करने के लिए वाराणसी से सरिता अग्रवाल की अगुवाई में एक दल बुधवार को विण्ढमगंज पहुंच गया। यह जानकारी सन क्लब सोसायटी के अध्यक्ष रमेश चंद्र सिंह ने दी। उधर तैयारियों के संबंध में बुधवार को दुद्धी एसडीएम भानु प्रताप सिंह ने कार्यक्रम स्थल का जायजा लिया। कोन: चार दिवसीय छठ पूजा की शुरुआत मंगलवार को नहाय-खाय के साथ हो गई है। बुधवार को कोन, चांचीकला, रामगढ़, कचनरवा, रोरवा आदि गांवों में बने छठ घाटों पर व्रतियों ने दीपक जलाकर छठ मइया का पूजन-अर्चन किया। आसनडीह: महाव्रत छठ के पावन त्योहार में व्रतियों ने घाटों पर दीपक जलाया। आसनडीह में बाजार के बगल मे तालाब, पोखरा, बैना में पांगन नदी समेत अन्य स्थानों पर बने घाटों पर व्रतियों एवं श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। छठ मइया के गीत से समूचा इलाका भक्तिमय हो गया। चोपन: नगर के सोननदी तट पर छठ पूजा की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। नदी तट पर वेेदी बनाकर व्रतियों ने पूजा-अर्चना की। घर से छठ मईया का गीत गाते हुए श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे। रात में छठ घाट जगमग जगमग हो गया। दुद्धी: छठ पूजा दूसरे दिन ठाढ़ उपासी के बाद नदियों, जलाशयों के किनारे बने वेदी पर पहुंची और डूबते सूरज को अर्घ दिया । दुद्धी के प्राचीन शिवाजी तालाब, मल्देवा में कैलाश कुंज द्वार खजुरी में शिवमंदिर, दिघुल में ठेमा नदी घाट, टेढ़ा में कनहर सहित अन्य आसपास के नदियों के किनारे थाला बनाकर छठी मईया की गीत भजन कीर्तन करती रही।