अनपरा/शक्तिनगर। केंद्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर मंगलवार को शुरू दो दिनी हड़ताल का कोयला क्षेत्र में असर दिखाई दिया। मजदूरों ने कोयला उत्पादन व प्रेषण बुरी तरह प्रभावित होने का दावा करते हुए हड़ताल को सफल बताया तो कोल प्रबंधन ने आंशिक प्रभाव वाला बताया। बिजली क्षेत्र में भी हड़ताल का असर देखने को मिला। कोयला क्षेत्र में इंटक, एटक, सीटू, एचएमएसए संयुक्त रूप से हड़ताल में शामिल रहे। कोल श्रमिकों ने मंगलवार की सुबह सभी कोल परियोजनाओं के प्रवेश द्वार पर केंद्र सरकार व कोल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। हड़ताली कर्मियों ने सड़क व रेल मार्ग से कोल परिवहन को ठप कर दिया। इसके साथ निजी वाहनों को भी खदान क्षेत्र में नहीं जाने दिया। हड़ताल का ज्यादा असर पहली पाली में दिखाई दिया। मजदूर नेताओं ने दावा किया कि एनसीएल दुद्धीचुआ व जयंत कोयला परियोजना से रेल रैक के जरिए बाहर जाने वाले कोयले की एक रैक भी नहीं गई। कर्मियों ने एकजुटता दिखाई और इसके चलते आंदोलन सफल रहा। एनसीएल के जलापूर्ति संस्थान से जलापूर्ति ठप होने से कोयला क्षेत्रों के साथ आवासीय परिसरों में पानी के लिए परेशान रहे। हड़ताल का असर ककरी, बीना, कृष्णशिला, खड़िय़ा, दुद्धीचुआ, अमलोरी, झिंगुरदह ब्लाक बी परियोजना में कहीं ज्यादा तो कहीें कम दिखाई दिया। एनसीएल के प्रवक्ता सीरज कुमार सिंह ने मंगलवार शाम हड़ताल के प्रभाव की जानकारी देते हुए बताया कि प्रथम व सामान्य पाली में करीब 12 प्रतिशत कर्मी हड़ताल पर रहे। बताया कि सात जनवरी की प्रथम पाली के मुकाबले मंगलवार कोयला उत्पादन 98 फीसदी व प्रेषण (डिस्पैच) 84 प्रतिशत रहा। उनका कहना था कि सोमवार को कंपनी के सभी क्षेत्रों (प्रोजेक्टों) ने 95 हजार 198 टन कोयला उत्पादन व एक लाख 21 हजार 613 टन कोयला डिस्पैच किया था जो हड़ताल के दौरान यानि मंगलवार को प्रथम पाली में उत्पादन 93 हजार 328 टन तथा प्रेषण एक लाख दो हजार 27 टन रहा।