सोनभद्र। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती के उपलक्ष्य में अधिवक्ता दिवस पर सोमवार की रात बार एसोसिएशन सभागार में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन हुआ। प्रभारी जनपद न्यायाधीश यशवंत मिश्र समेत अन्य न्यायिक अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। अधिवक्ता प्रद्युमभन कुमार त्रिपाठी की कृति ‘खल संवाद’ का विमोचन कर उन्हें सम्मानित किया गया। अध्यक्षता कर रहे अजय शेखर ने अब बाजारों में यहां ईमान बिकता है, रुदन की दुकान सजती गान बिकता है, कुछ आ गई है सस्ती इस कदर यहां कि कौड़ियों के मोल अब इंसान बिकता है...सुनाकर अंतर्मन को झकझोरा। वाराणसी के रामनरेश पाल ने प्रेम क पाठ पढ़ावत भौंरा हो, कांटन फूलन लेत रवानी.., डॉ. रणजीत सिंह प्रतापगढ़ी ने बंटवारा मां बाप का न करना चाहिए.., ऊंचाहार के कपिल देव तिवारी ने वीणा वादिनी की झंकार बन जाऊं.., अनीता सोनपरी ने प्रेम की गंगा बहाते रहो.., वाराणसी की पूनम श्रीवास्तव ने जब हृदय से कोई प्रार्थना हो गई, पूरे जीवन की सब साधना हो गई.., शमीम गाजीपुरी ने वो जरूर आएगा माहौल बदल जाने दो... सुनाकर तालियां बटोरी। राष्ट्रीय कवि कमलेश राजहंस ने सीमा पर गोली खाने को जो खड़ा हुआ है.. सुनाकर देशभक्ति का जज्बा जगाया। हरीश ने मैं भारत हूं, भारत मेरा है, बहुत पहले से यहां मेरा डेरा है.. से महफिल को ऊंचाई दी। अमेठी के रामबदन शुक्ल पथिक, इलाहाबाद के लालबिहारी अंबर, बेहोश जौनपुरी, चंदौली के शिवदास ने हास्य-व्यंग्य की एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाई। नजर मोहम्मद नजर, अब्दुल हई, प्रद्युम्र तिवारी, अशोक तिवारी, ईश्वर बिरागी, जयराम सोनी, जगदीश पंथी, सुनील कुमार, दिलीप सिंह दीपक, दिवाकर द्विवेदी आदि की भी रचनाएं सराही गई। आयोजक बार अध्यक्ष ओमप्रकाश पाठक एडवोकेट ने धन्यवाद ज्ञापित किया। एडवोकेट चंद्रकांत शर्मा, लालता पांडेय, वेदमणि तिवारी, ठाकुर कुशवाहा, राकेश शरण मिश्र, नित्यानंद द्विवेदी, मनोज तिवारी, राजबली चौबे, पीएन पांडेय समेत तमाम लोग देर रात तक जमे रहे।