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अग्निशमन यंत्र चलाने का नहीं मिला प्रशिक्षण

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सोनभद्र। जिले में सरकारी, गैर सरकारी विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र लगे हैं, लेकिन उनके संचालन का प्रशिक्षण शिक्षकों को नहीं दिया गया है। यदि किसी विद्यालय में कभी आग लग जाए तो नुकसान की कल्पना सहज ही की जा सकती है। ऐसे में बच्चों के साथ भी खतरा हो सकता है। प्रशिक्षण को लेकर विभागीय स्तर पर उदासीनता है। जिले में परिषदीय और मान्यता प्राप्त करीब 2490 विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में करीब ढाई लाख से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र लगाने का निर्देश दिया हैै। इस निर्देश के तहत विद्यालयों में यंत्र तो लगा दिये गए लेकिन उससे जुड़ा प्रशिक्षण न तो अग्निशमन विभाग ने शिक्षकों को दिया और न ही बेसिक शिक्षा विभाग ने इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इसका नतीजा है कि इन अग्निशमन यंत्रों का संचालन बगैर किसी प्रशिक्षण के ही शिक्षकों को विपरीत परिस्थितियों में करना पड़ सकता है। विद्यालयों में गैस सिलेंडर और घरेलू चूल्हे पर मिड डे मील बनता है। इससे आग लगने की आशंका बनी रहती है। घोरावल: बीईओ उदयचंद्र राय ने बताया कि घोरावल ब्लॉक के सभी 304 प्राथमिक विद्यालयों एवं सभी 104 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। सभी विद्यालयों में दो सिलेंडर लगाए गए हैं और चार बाल्टी बालू रखा गया है। यह सभी अग्निशमन यंत्र सात वर्ष पूर्व लगाए गए थे। गैस सिलेंडर में भरे गैस की मियाद खत्म होने पर उसे रिफिलिंग किया जाता है। इस वर्ष मई महीने में सभी विद्यालयों में लगे सिलेंडरों की रिफिलिंग की गई थी। वर्तमान समय में सभी परिषदीय विद्यालयों में लगे अग्निशमन यंत्र ठीक ठाक हैं। अग्निशमन यंत्रों के अनुप्रयोग के प्रशिक्षण के संबंध में बताया कि फायर ब्रिगेड ने इसके लिए किसी भी तरह का प्रशिक्षण नहीं दिया। इसको लेकर कार्यशाला नहीं लगाई गई। विद्यालयों के अध्यापक या कर्मचारी इसका प्रयोग करते हैं। निजी स्कूलों में भी अग्निशमन यंत्र लगे हैं। बभनी: ब्लॉक के 115 प्राथमिक विद्यालय तथा 41 पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। सभी पर अग्निशमन यंत्र लगे हैं। ब्लाक समन्वयक जगरनाथ के अनुसार विद्यालयों लगे अग्निशमन यंत्रों की समय-समय पर जांच भी की जाती है।
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